लखनऊ, जागरण संवाददाता। भारतीय संस्कृति में त्योहार न केवल हमे हमारी परंपराओं से परिचित कराते हैं बल्कि हमारे अंदर आस्था और विश्वास जगाने का भी काम करते हैं। यही वजह है कि विकास के दौर में भी ईश्वर के प्रति हमारी श्रद्धा कम नहीं हुई है। पौराणिक ग्रंथों के साथ ही सामाजिक मान्यताएं हमे अपने धर्म के प्रति धर्मनिष्ठ बनाती हैं। इसी मंशा के चलते हम हर त्योहार को अपने ढंग से मनाने में आगे रहते हैं। चांद के दीदार का पर्व पर करवा चौथ पर शहर में हर ओर उल्लास का रंग दिखने लगा है।

नवविवाहिताओं में करवाचौथ के व्रत को लेकर खासा उत्साह है। उन्होंने हाथों में मेंहदी रचाई है वहीं विवाह का जोड़ा पहनने के लिए तैयार कर लिया है। पार्लर जाकर नई दुल्हनों ने अपने स्वाभाविक आकर्षण को बढ़ाया, वहीं दूल्हे राजा भी सैलून हो आएं हैं। इस यादगार पल को जश्न के रूप में मनाने की तैयारियां भी पूरी कर ली गई है। डालीगंज के साहू परिवार की छोटी बहू रवीना का पहला करवा है। लखनवी रिवाज पहाड़ी अंदाज में पहला करवा की पूजा करने की तैयारियां पूरी हो गई हैं।

रवीना ने बताया कि करवा के दिन सास द्वारा सुहागन का पूरा सामान दिया जाता है और मायके से करवा, चूड़ा, वस्त्र, सेवा और मिठाइंया आती हैं। इस दिन सभी सुहागन शादी का जोड़ा संग पहाड़ी नथ का पहनती है। पूरे दिन निर्जला व्रत और चांद के दर्शन के समय सासू मां द्वारा करवा पर कहानी कहकर करवा पूजा करके व्रत खोला जाएगा। आलमबाग आजाद नगर में रहने वाली रंजना का इस साल पहला करवाचौथ है। उनका विवाह बीते साल आशीष तिवारी से आठ दिसंबर को हुआ था। लंबे अंतराल के बाद करवाचौथ उनके परिवार के लिए सबको एकत्र करने का सुनहरा अवसर लेकर आया है। इस अवसर पर रंजना और अशीष अपने परिवार के साथ करवा मनाएंगे।

इंतजार कराएगा चांद : कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के करवा चौथ होता है। रविवार करवा चौथ सर्वार्थ सिद्धि व शिव योग में मनाया जाएगा। आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां पति के स्वास्थ आयु एवं मंगल कामना के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत सौभाग्य और शुभ संतान देता है। प्रातः काल स्त्रियां स्नान करके सुख सौभाग्य का संकल्प करना चाहिए। शिव पार्वती, कार्तिकेय, श्री गणेश व चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। चंद्रोदय शाम 7:56 बजे है लेकिन लखनऊ में चंद्रमा रात 8:01 से 8:05 बजे के बीच नजर आएगा। ऐसे में सुहागिनों को चंद्रोदय के बाद इंतजार करना होगा।

पांच साल बाद रोहिणी नक्षत्र : आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि चंद्रोदय एक घड़ी (24 मिनट) के भीतर पूजन करना उत्तम रहेगा। शाम 5:30 से 6:46 बजे के बीच करवा चौथ पूजन का मुहूर्त है। रविवार को व्रत होने से सूर्य देव का भी शुभ प्रभाव इस व्रत पर पड़ेगा। पांच साल बाद रोहिणी नक्षत्र मिल रहा है। रोहिणी नक्षत्र स्वयं चंद्रमा का नक्षत्र है रोहणी का चंद्र दर्शन मनोवांछित फल प्रदान करता है। आचार्य आनंद दुुबे ने बताया कि इंद्रप्रस्थ के वेद शर्मा की बेटी वीरावती ने इंद्राणी और द्रोपदी ने भगवान कृष्ण के कहने पर पहली बार व्रत रखा था।

धातु व मिट्टी के करवे : आचार्य आनंद दुबे ने बताया कि मान्यता है कि धातु के बने करवे से चौथ का पूजन करना फलदायी होता है, लेकिन यथा शक्ति मिट्टी के करवे से पूजन भी किया जा सकता है। मान्यता है कि इस दिन के बाद से ही ठंड शुरू हो जाती है। कहा जाता है कि करवे की टोटी से ही जाड़ा निकलता है और धीरे-धीरे वातावरण में ठंड का एहसास बढ़ जाता है।

शिव-पार्वती की होती है पूजा : आचार्य राकेश पांडेय ने बताया कि करवाचौथ के व्रत में शिव पार्वती, कार्तिकेय, गणेश और चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के दिन शाम के समय चंद्रमा को अघ्र्य देकर ही व्रत खोला जाता है। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास या सास की उम्र के समान किसी सुहागिन के पैर छूकर सुहाग की सामग्री भेंट करना उत्तम होता है। छह या आंगन में गाय के गोबर से लीपकर और स्वास्तिक बनाकर पूजन करना चाहिए।

Edited By: Anurag Gupta