लखनऊ (राज्य ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश कर्मचारी कल्याण निगम व आवश्यक वस्तु निगम को किसानों से धान खरीद की अनुमति फिर मिल सकती है। इस बार की धान खरीद नीति में इन दोनों निगमों को बाहर कर दिया था। खाद्य एवं रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह ने कल अधिकारियों को इसके लिए संशोधित प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया, जिसे जल्द ही कैबिनेट के सामने लाया जा सकता है। इस प्रस्ताव में राइस मिलों को न्यूनतम दो टन धान खरीदने अनिवार्यता भी समाप्त की जा सकती है।

मंत्री रघुराज प्रताप सिंह ने जन प्रतिनिधि एवं राइस मिलर्स एसोसिएशन की शिकायतों को गम्भीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद को धान खरीद नीति की खामियों को दूर करने के निर्देश दिए। जन प्रतिनिधियों एवं राइस मिलर्स एसोसिएशन ने मंत्री को ज्ञापन सौंपकर कहा था चावल मिलों के लिए न्यूनतम दो टन अनिवार्यता से पूर्वाचल क्षेत्र की अधिकाश मिलें स्वत: प्रतिबन्धित हो गई है। ऐसे में राइस मिल उद्योग को भारी क्षति होगी और इसका सारा उत्तरदायित्व राज्य सरकार पर आएगा। खाद्य एवं रसद मंत्री ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि खाद्य विभाग के दोनों निगमों उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम एवं आवश्यक वस्तु निगम को धान खरीद में शामिल न किये जाने से न केवल भारत सरकार से मिलने वाले 2.5 फीसद कमीशन की आर्थिक क्षति होगी, बल्कि निगमों को अनावश्यक वित्तीय क्षति उठानी पड़ेगी।

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