लखनऊ,(जेएनएन)। विवेक तिवारी हत्याकांड की चार्जशीट में प्रशांत के साथ घटनास्थल पर मौजूद सिपाही संदीप कुमार को क्लीन चिट देने की पुलिस थ्योरी से विवेक के परिवार वाले नाराज हैं। विवेक की पत्नी कल्पना ने संदीप को भी हत्याकांड में बराबरी का दोषी बताते हुए 302 के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। बुधवार को पुलिस द्वारा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने के बाद कल्पना ने कहा कि वह कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगी। अब उनको न्यायपालिका पर ही भरोसा है।

संदीप चाहता तो बच सकती थी पति की जान

कल्पना ने रुंधे गले से कहा कि संदीप अगर पति की हत्या में दोषी नहीं था तो वह प्रशांत को गोली मारते समय विरोध कर रोक सकता था। हत्याकांड में दोनो की मिलीभगत है। घटना के समय प्रशांत और संदीप काफी देर तक पति से नोकझोंक करते रहे। सना ने विरोध किया तो संदीप ने उसे डंडा मारा। उसके बाद प्रशांत ने संदीप के सामने विवेक की हत्या के इरादे से गोली मारी। गोली मारने के बाद भी कोई पति को अस्पताल नहीं ले गया। वह मौके पर ही काफी देर तक तड़पते रहे। संदीप अगर निदरेष था तो फिर विवेक को अस्पताल क्यों नहीं ले गया। इसके बाद कल्पना फूट-फूटकर रोने लगी। कल्पना को रोता देख छोटी बेटी दिव्यांशी पहुंची और दुपट्टे से मां के आंसू पोंछने लगी।

दोनों ने लगा रखी थी सीट बेल्ट 

चार्जशीट के मुताबिक सना और विवेक ने सीट बेल्ट लगा रखी थी। घटना के समय गाड़ी चल रही थी। गोली लगने के बाद बेल्ट पर खून के छींटे मिले हैं। अगर बेल्ट न लगी होती तो कपड़ों के साथ बेल्ट पर खून के धब्बे न होते। गोली लगने के बाद जब विवेक ने गाड़ी की रफ्तार बढ़ाई तो आगे पोल में टकराने के बाद एयर बैग खुल गए, जिससे सना की जान बच गई। प्रशांत के बयान के मुताबिक जब वह पहुंचा तो एक्सयूवी सड़क किनारे रुकी थी और अंदर दोनों आपत्तिजनक स्थिति में थे।

 

सिपाही संदीप के पिता एसआइटी जांच से संतुष्ट

मेरठ के बडौत जिला मोहल्ला न्यू रामनगर निवासी सिपाही संदीप कुमार के पिता सत्येंद्र सिंह ने हत्या के मामले में बेटे को क्लीनचिट मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच कराई, जिससे जनता का विश्वास उनके प्रति और बढ़ गया है। सत्येंद्र सिंह एसआइटी जांच से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए एसआइटी के सदस्यों का बहुत आभार।

दो घंटे तक नहीं समझ पायी थी पुलिस की साजिश

कल्पना ने बताया कि घटना के बाद जब वह सूचना पर लोहिया अस्पताल पहुंची तो पुलिस अधिकारी और हत्यारोपित सिपाही प्रशांत व संदीप उसे बरगलाते रहे। अधिकारी भी सिपाहियों की करतूत पर पर्दा डालते रहे। पति पर अभद्र आरोप लगाते रहे। पहले तो उन्होंने गोली चलाने की बात ही नकार दी। अधिकारियों का कहना था कि विवेक की कार रोकने का जब सिपाहियों ने प्रयास किया तो विवेक ने उन्हें कुचलने की कोशिश की। आत्मरक्षा में सिपाही ने गोली चलाई। पर जब सना से बात हुई और तथ्य सामने आए तो पुलिस की थ्योरी ही घूम गई।

 

फास्ट ट्रैक कोर्ट में चले मुकदमा, आरोपितों को मिले फांसी की सजा

कल्पना के भाई विष्णु ने बताया कि घटना के बाद एक अक्टूबर को बहन के साथ मुख्यमंत्री से योगी आदित्यनाथ से उनकी मुलाकात हुई थी। मुख्यमंत्री ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री की बात पर उन्हें भरोसा है। क्योंकि सरकार और शासन ने उनका पूरा साथ दिया है। मुख्यमंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने की बात कही थी। कल्पना ने बताया कि अब मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलना चाहिए ताकि आरोपितों को फांसी की सजा मिले।

तत्कालीन सीओ और इंस्पेक्टर पर होगी कार्रवाई

एसआइटी रिपोर्ट में तत्कालीन सीओ गोमतीनगर चक्रेश मिश्र और इंस्पेक्टर डीपी तिवारी की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए दोनों पर पुलिस की छवि धूमिल करने की बात कही गई है। थाने में प्रशांत को बुलाकर मीडिया से आमना-सामना कराने समेत कई प्रमुख तथ्य एसआइटी रिपोर्ट में शामिल कर डीजीपी को भेजा गया है। यह भी बताया गया है कि एसएसपी ने पत्रकारवार्ता कर आरोपित सिपाहियों को जेल भेजने की बात कही लेकिन सीओ और इंस्पेक्टर ने दोनों सिपाहियों को थाने बुलाकर मीडिया से बातचीत करा दी।

 

 

अब तक पूरी नहीं हुई मजिस्ट्रेट जांच

चर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड की एसआईटी जांच 90 दिनों से पहले ही पूरी हो गई लेकिन मजिस्ट्रेट जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है। डीएम कौशल राज शर्मा का कहना है कि जांच में कुछ बिंदु शेष हैं जल्द ही मजिस्ट्रेट द्वारा रिपोर्ट दाखिल कर दी जाएगी। 28 सितंबर गोमतीनगर में विवेक तिवारी को गोली मारी गई थी। अगले ही दिन डीएम ने मजिस्ट्रेट जांच का आदेश 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया था। अपर नगर मजिस्ट्रेट सलिल कुमार पटेल हत्याकांड की मजिस्ट्रेट जांच कर रहे हैं।

दैनिक जागरण की खबर पर एसआइटी की मुहर

दैनिक जागरण ने विवेक तिवारी हत्याकांड में पहले ही दिन की खबर में तीस सितंबर के अंक में ग्राफ के जरिए सिपाही प्रशांत के विवेक को सामने से गोली मारने की बात प्रमुखता से प्रकाशित की थी। जागरण की पड़ताल में सिपाहियों की बाइक दाहिने गिरने और बाइक के पहिये पर एक्सयूवी चढ़ने की बात को भी ग्राफिक्स के जरिये समझाया गया था। साथ ही इसमें कुछ दूर जाने के बाद एक्सयूवी के पोल में टकराने की बात भी थी। एसआइटी रिपोर्ट और चार्जशीट में भी इसपर मोहर लग गई है।

 

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