लखनऊ, जागरण संवाददाता। शहर में तीन दिन का उत्सवी मेला सोमवार से शुरू हो गया है। यह उत्सव है उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत का, यहां के संगीत और लजीज व्यंजनों का। यह उत्सव है कला और कलाकारों का। रिवर फ्रंट गवाह बना है, उन झूमती-गाती शामों का, जहां हर चेहरे पर बस उत्साह और उमंग है। यह मौका है, एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों का लुत्फ उठाने का। साथ ही प्रदेश भर से आए कलाकारों से मिलकर उनके हुनर को सराहने का। यहां लोग लजीज पकवानों का खूब स्वाद ले रहे, साथ ही सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजन की रौनक बढ़ा रहे। पर्यटन पर्व की पहली शाम की उम्दा प्रस्तुतियों के बाद मंगलवार को कबीर कैफे बैंड की प्रस्तुति विशेष होगी। साथ ही मिथलेश लखनवी का गजल गायन भी होगा।

सोमवार को सृष्टि जिनसे आरंभ हुई, उन देवी की अभ्यर्थना करते हुए प्रख्यात लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने अनादि देवी अंबिके तुम्हें सतत् प्रणाम है... गीत के साथ सांस्कृतिक संध्या का आकर्षण बढ़ाया था। उन्होंने विंध्याचल की रानी को समर्पित गीत झूले मा बैठी झूलैं मोर महारानी... भी सुनाया। डम डम डमरू बजावे हमार जोगिया...गीत के साथ महादेव महिमा का सुरमयी वर्णन भी किया।

यह सुरीला सफर काशी से अयोध्या पहुंचा। मालिनी अवस्थी ने कहा, आज अयोध्या उदास नहीं, चटख लगती है और अवध मा बाधे आज बधइयां...गीत सुनाया। अगली प्रस्तुति रामत्व पर केंद्रित रही। शबरी प्रसंग आज बसो शबरी घर रामा... ने विभोर किया। अन्य प्रस्तुतियों में राम महिमा का गुणगान करते हुए प्रसंगों को सुरों में पिरोकर पेश किया था। संगतकर्ताओं के तौर पर धर्मनाथ मिश्र, अनुराग श्रीवास्तव, राकेश आर्या, सचिन ने साथ निभाया। इससे पहले उप्र संगीत नाटक अकादमी की प्रस्तुति में श्रुति शर्मा के निर्देशन में प्रियम, सृष्टि, आरोही, अंतरा, शगुन ने कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। तबले पर राजीव शुक्ला, बांसुरी पर दीपेंद्र कुंवर ने साथ दिया। इसके बाद निधि श्रीवास्तव ने साथियों अंकिता सिंह, सपना सिंह, अनुष्का, अनामिका, अभय सिंह, और देवकीनंदन के साथ रघुवीरा नृत्य प्रस्तुति दी थी।

 

Edited By: Rafiya Naz