लखनऊ, जागरण संवाददाता। जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआइसी) की जांच को गति देते हुए तीन सदस्यीय टीम ने जांच रिपोर्ट तैयार करके शासन को भेजी गई है। वहीं, सदस्यों ने दिल्ली से जेपीएनआइसी में इस्तेमाल हुए उपकरणों की सूची दिल्ली से मंगाकर मिलान भी कराया है। जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि साढ़े चार साल बाद फिर से जेपीएनआइसी के संचालन को लेकर लविप्रा द्वारा अनुमानित लागत के आधार पर काम की शुरुआत की अनुमति मिल सकती है। शासन के आदेश पर गठित तीन सदस्यीय टीम एक सप्ताह के भीतर पांच से छह बार जेपीएनआइसी में इस्तेमाल किए गए विद्युत, निर्माण सामग्री व अन्य उपकरण की जांच कर चुकी है। 

समिति ने देखा कि स्वीकृत डीपीआर से अधिक धनराशि व्यय की गई है या नहीं, उसके औचित्य का परीक्षण किया। स्वीकृत डीपीआर से अतिरिक्त कराए गए कार्यों व उनके आगणन और व्यय का परीक्षण भी टीम ने किया। स्वीकृत डीपीआर की मदों में उल्लेखित कार्यों की मात्रा में विचलन के औचित्य का पता टीम ने लगाया। वहीं लविप्रा द्वारा कराए गए कार्यों के लिए अपनाई गई टेंडर प्रकिया में नियमों के अनुपालन किया गया या नहीं। इसी तरह परियोजना को पूरा करने के लिए सचांलित करने के लिए न्यूनतम आवश्यक कार्यों को कराने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई पुनरीक्षित डीपीआर का परीक्षण भी तीन सदस्यीय टीम ने किया है। टीम में मुख्य अभियंता भवन लोक निर्माण विभाग यूपी, मुख्य अभियंता विद्युत यांत्रिक लोक निर्माण विभाग उत्तर प्रदेश और मुख्य अभियंता सेस उत्तर प्रदेश पवर कारपोरेशन निगम के अफसर हैं।

Edited By: Vikas Mishra