लखनऊ। जागरण 'पहल' और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में हुई कार्यशाला में जुटे लोगों ने बाल विवाह के मुद्दे पर बेबाक राय दी। दो सत्रों में चले इस मंथन में मुरादाबाद के प्रशासनिक व पुलिस अफसरों के साथ एनजीओ संचालक व पत्रकारों ने भी विचार रखे। भिन्न-भिन्न विचारों के बाद एक राय बनी कि गांव में बेटियों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा जाए, सामाजिक व संवैधानिक संस्थाएं लगातार संवाद बढ़ाएं, जिससे बाल विवाह को पूरी तरह से रोका जा सके। प्रस्ताव पर प्रशासनिक अफसरों ने भी पूरी मदद का आश्वासन दिया।

देश के आठ राज्यों में बाल विवाह की स्थिति चिंताजनक है। इस चिंता को जड़ से दूर करने के लिए शुक्रवार को जागरण 'पहल' और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में दिल्ली रोड स्थित राही होटल में कार्यशाला हुई। प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि मंडलायुक्त सुभाष चंद्र शर्मा ने बाल विवाह रोकने के लिए बालिका शिक्षा पर जोर देते हुए अपनी तरफ से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। इसी कड़ी में दैनिक जागरण के कार्यकारी संपादक विष्णु त्रिपाठी ने कहा कि सामाजिक व संवैधानिक संस्थाएं मर्यादा में रहते हुए बाल विवाह के निषेध के लिए पहल करें। संवाद बढ़ाएं, क्योंकि संवाद से ही सामाजिक कुरीतियों का समाधान संभव है। 'पहल' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद माधव, यूनिसेफ के आफताब मोहम्मद और परवीना ने भी बाल विवाह की तस्वीर उजागर की।

दूसरे सत्र के मुख्य अतिथि रहे जिलाधिकारी दीपक अग्रवाल ने कहा कि युवा यदि शिक्षित होगा तो बाल विवाह अपने आप रुक जाएगा। इससे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू देवी, एसएसपी लव कुमार, एसपी सिटी डॉ. रामसुरेश यादव, एसपी ग्रामीण प्रबल प्रताप सिंह, एमएच कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हरबंश दीक्षित ने भी अपने अनुभवों और विचारों को साझा किया। विभिन्न एनजीओ से जुड़े प्रबुद्ध वर्ग ने भी अपने सुझाव देते हुए उन्हें अमल में लाने पर बल दिया। दैनिक जागरण मुरादाबाद के सीजीएम एएन सिंह, जीएम अनिल अग्रवाल, समाचार संपादक धर्मेंद्र त्रिपाठी आदि ने अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।

Posted By: Nawal Mishra