लखनऊ (जेएनएन)। यूपी इन्वेस्टर्स समिट के दौरान प्रदेश में निवेश के लिए हुए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का राज्य सरकार सत्यापन कराएगी। सरकार यह देखेगी कि निवेशकों ने एमओयू के माध्यम से निवेश का जो दम भरा है, उसे जमीन पर उतारने का उनमें वाकई दमखम है या नहीं। बैंकिंग जगत को हिलाने वाली हाल की घटनाओं से सबक लेते हुए वह यह भी सुनिश्चित करेगी कि एमओयू करने वाली कंपनियां या निवेशक कहीं बैंकों के डिफाल्टर तो नहीं हैं। प्रदेश में निवेश के लिए अब तक 4.68 लाख करोड़ रुपये के 1074 एमओयू हस्ताक्षरित हो चुके हैं।

अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आइआइडीसी) डॉ.अनूप चंद्र पांडेय ने सोमवार को इस सिलसिले में विभिन्न विभागों के साथ अलग-अलग बैठकें कर निर्देश दिये। यह बैठकें पर्यटन, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन, ऊर्जा, अतिरिक्त ऊर्जा, दुग्ध विकास, आइटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभागों के साथ हुईं। आइआइडीसी ने विभागों से कहा है कि वे अपने से संबंधित सभी एमओयू को ठोक-बजा कर परख लें। एमओयू करने वाली निवेशक कंपनियों का लाइन ऑफ बिजनेस और उनका टर्नओवर देखें।

यह भी मूल्यांकन करें कि उसने जिस प्रोजेक्ट के लिए एमओयू किया है, अपने टर्नओवर और माली हैसियत के हिसाब से उसे अंजाम देने की उसमें कूवत है या नहीं। विभागों को यह भी निर्देश दिये गए हैं कि निवेशकों से वे यह भी पूछें कि वह अपना प्रोजेक्ट किस जिले में और किस स्थान पर स्थापित करना चाहते हैं। परियोजना के लिए उनके पास जमीन उपलब्ध है या नहीं। यदि जमीन नहीं है तो क्या उसका इंतजाम वे खुद करेंगे या इस बारे में सरकार से सहयोग की अपेक्षा है। विभागों से यह भी पता करने के लिए कहा गया है कि निवेशक सरकार से क्या सुविधाएं और रियायतें चाहते हैं।

बैठक में विभागों को खासतौर पर यह भी ताकीद किया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि निवेशक कंपनियां कहीं बैंकों से कर्ज लेने के बाद डिफाल्ट तो नहीं कर रही हैं। ऐसा तो नहीं है बैंकों से उनके द्वारा लिया कर्ज फंस कर एनपीए में तब्दील हो गया हो। यह भी देखने के लिए कहा गया है कि कहीं कोई निवेशक ब्लैकलिस्ट तो नहीं हुआ है। सत्यापन के बाद जो निवेशक इन कसौटियों पर खरे उतरेंगे, आइआइडीसी ने विभागों से उनके एमओयू की सूची नौ तारीख तक उपलब्ध कराने के लिए कहा है।

डीएम भी करें विश्लेषण

आइआइडीसी ने सोमवार को जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग कर उन्हें जिलों में निवेश के लिए हुए एमओयू का विश्लेषण करने का निर्देश दिया है ताकि यह पता चल सके कि इनमें से कितने निवेश प्रस्ताव व्यावहारिक हैं। गौरतलब है कि कई निवेशकों ने जिलों में जिलाधिकारियों के समक्ष भी एमओयू किया है। जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वे एमओयू को अमली जामा पहनाने की दिशा में कदम बढ़ायें। यह भी सुनिशिचत करें कि निवेशकों को कोई असुविधा न हो।

बड़े निवेशकों के साथ शुरू होगा बैठकों का सिलसिला

निवेश प्रस्तावों का सत्यापन कराने के साथ सरकार भारी-भरकम निवेश के लिए एमओयू करने वाले बड़े निवेशकों के साथ बैठकों का सिलसिला भी शुरू करने जा रही है ताकि उनके प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। इस सिलसिले में अडानी समूह के साथ सात मार्च, श्रेय इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ नौ मार्च और आदित्य विक्रम बिड़ला समूह के प्रतिनिधियों के साथ 13 मार्च को बैठकें प्रस्तावित हैं। 

By Ashish Mishra