लखनऊ, जेएनएन। आयुर्वेद और यूनानी पद्धति में बहुत अधिक समानता है। दोनों ही प्रकृति के पौधों और वनस्पति का उपयोग करते हैं। रोग से लडऩे के लिए दवाओं के साथ-साथ इच्छा शक्ति की भी जरूरत होती है। आयुष के लिए भारत सरकार काम कर रही है। यह बात राज्यपाल राम नाईक ने इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल हार्मोनी एंड अपलिफ्टमेंट की ओर से वर्ल्‍ड मेडिसिन के अवसर पर कही। 

वनस्पति की क्षमता पर भी हो शोध

राज्यपाल ने कहा कि आयुर्वेद देश की परम्परागत चिकित्सा पद्धति है। आयुर्वेद में जहां चरक, सुश्रुत का नाम आता है। वहीं यूनानी का भी अलग महत्व है, दोनों प्रकृति से लाभदायक वनस्पति और पौधों का उपयोग करते हैं। यूनानी अरब देश से आई है, एक हजार साल पुरानी पद्धति है। इंडिया में भी उपयोग में लाई जाती है।

शहीद सैनिकों के लिए मुख्यमंत्री ने उठाया सराहनीय कदम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2018 में शहीद सैनिकों, अद्र्धसैनिकों, पुलिस और सेना के परिवारवालों को आर्थिक मदद के साथ नौकरी देने का कार्यक्रम शुरू किया है जो कि बेहद सराहनीय कदम है। 

अजीम शख्सियत थे इबने सीना

संस्था के चैयरमेन अध्यक्ष डॉ.अनीस अंसारी ने कहा कि तिब के जनक अल हसन बिन अली बिन सीना शहर बुखारा के अफशना उज्बेकिस्तान में पैदा हुए थे। इबने सीना तिब के साथ लेखक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, कवि भी थे। उनकी किताब अल कैनन इसी साल आज से एक हजार वर्ष पहले लिखी गई। यह यूरोप के विश्वविद्यालयों में 500 वर्ष तक पाठ्यक्रम में शामिल रही।

अनीस अंसारी ने राज्यपाल से बरेली में यूनानी कॉलेज की स्थापना के लिए आग्रह किया, वहीं आयुष चिकित्सकों के लिए ब्रिज कोर्स शुरू करने की सिफारिश भी की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ.एके त्रिपाठी, केजीएमयू के जीरायाट्रिक मेडिसिन विभाग के प्रो.कौसर, अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के डॉ.मोहम्मद मोहसिन, सोसाइटी के संरक्षक व ईदगाह के इमाम खालिद रशीद फरंगी महली मौजूद रहे। 

Posted By: Anurag Gupta

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