लखनऊ [निशांत यादव]। पहली मेक इन इंडिया सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टीलरी गन के9-वज्र बनाने के बाद भारत अब साउथ कोरिया की मदद से एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करेगा। साउथ कोरिया की कंपनी हनवहा टेक विन की हाइबिड-बिहो सेल्फ प्रोपेल्ड एयर डिफेंस गन व मिसाइल सिस्टम भी देश में तैयार होगा। के9-वज्र गन भी हनवहा की थी। जिसे एलएंडटी ने बनाया है। 

 दरअसल, साउथ कोरिया भारत में बड़ी संभावनाएं तलाश रहा है। के9-वज्र के बाद अब साउथ कोरिया की नजर भारतीय सेना के लिए एयर डिफेंस व आम्र्ड व्हील्ड व्हीकल पर है। साथ ही साउथ कोरिया ने डिफेंस एक्सपो की थीम 'डिजिटल ट्रांसफारमेशन ऑफ डिफेंसÓ की थीम को देखते हुए कई इलेक्ट्रानिक और डिजिटल उपकरण को भारत को सौंपने की तैयारी की है। जिसका इस्तेमाल भारतीय सेना करेगी। साउथ कोरिया ने भारत के साथ ग्लोबल डिफेंस सोल्यूशन लीडर बनने की रुचि दिखाई है। जिसके तहत वह भारत के साथ  डिफेंस इलेक्ट्रानिक, एम्युनेशन व पीजीएम, लैंड सिस्टम, एयरो स्पेस के क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहता है। 

यह होंगे कोरिया के खास हथियार 

हाइबिड बिहो : यह सेल्फ प्रोपेल्ड एयर डिफेंस गन व मिसाइल सिस्टम है। इसमें मिसाइल के साथ 30 एमएम कैलिबर की गन है, जो आसमान में उड़ रहे दुश्मनों के एयरक्राफ्ट व ड्रोन तक को मार गिराती है। इसमें टीपीएस-830 के रडार व फायर कंट्रोल रडार है। इसमें इलेक्ट्रो ऑप्टिकल टारगेटिंग सिस्टम, आगे देखने वाले इंफ्रारेड सिस्टम, लेजर से रेंज तय करने की सुविधा के साथ थर्मल, टीवी कैमरा व डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम लगे हैं। 

टाइगॉन व्हीकल 

अभी कोरिया आठ गुणे आठ श्रेणी का आम्र्ड व्हील व्हीकल को भारत में बनाने की तैयारी कर रहा है। अभी उसके पास 6 गुणे 6 श्रेणी वाला व्हीकल है। जो 11 जवानों के साथ सड़क पर 100 और पानी में आठ किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ सकता है। आठ गुणे आठ श्रेणी में व्हीकल में आठ टायर होंगे। जो 110 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति के साथ 16 जवानों को ले जा सकेगा। आस्ट्रेलिया इस समय कोरिया की रेड बैक इंफेंट्री फायङ्क्षरग व्हीकल इस्तेमाल कर रहा है। 

ईओटीएस  

यह इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम है। रात व दिन में दूर तक टारगेट ईओटीएस से देखा जा सकता है। इसमें एक लेजर रेंज लगी है। जिससे किसी संदिग्ध की दूरी का पता लगाया जा सकेगा। यह 360 डिग्री कोण में चारों तरफ घूम सकता है। यह ड्रोन को पांच, हेलीकॉप्टर को 15 और लड़ाकू विमान को 20 किलोमीटर तक देख सकता है। 

 

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