लखनऊ, जागरण संवाददाता। राजधानी में इस वक्त करीब 35 हजार ई रिक्शे चल रहे हैं। सभी चार्ज भी होते हैं और सुबह सड़कों पर दिखते हैं। नियमानुसार इन्हें चार्ज करने के लिए वाणिज्यिक बिजली का उपयोग होना चाहिए, लेकिन संचालनकर्ता घरेलू बिजली से ही इसे चार्ज कर रहे हैं। प्रतिदिन सात से आठ यूनिट बिजली की खपत एक ई रिक्शा चार्ज करने के लिए होती है। ऐसे में अगर 35 हजार ई रिक्शा चार्ज प्रतिदिन होते हैं तो करीब दो लाख अस्सी हजार यूनिट प्रति दिन की खपत होती है।

वाणिज्यिक रेट नौ रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से एक दिन में 25 लाख रुपये से अधिक बिजली से ई रिक्शा चार्ज हो रहे हैं। हालांकि यह ई रिक्शा घरेलू बिजली से चार्ज होते हैं अगर पांच रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से 35 हजार ई रिक्शा प्रतिदिन चार्ज किए तो यह खर्च 14 लाख रुपये का आता है। कुल मिलाकर नौ लाख रुपये की चोरी नियमित रूप से हो रही है। एक माह में 27 लाख और एक साल में सवा तीन करोड़ की बिजली ई रिक्शों को चार्ज करने में राजस्व को चोट पहुंचा रही है। 

राजधानी में नगर निगम व आरटीओ प्रशासन द्वारा एक भी ई रिक्शा चार्जिंग स्टेशन नहीं खोला गया। यही नहीं इनका कोई स्टैंड भी नहीं है। ऐसे में अवैध रूप से इनका संचालन और अनियमित रूप से बिजली का प्रयोग करके संचालित किए जा रहे हैँ। संचालनकर्ता घनी बस्ती में यह चोरी कर रहे हैं। धार्मिक स्थलों के बेसमेंट और घरों के भीतर ई रिक्शा खड़ा करके यह खेल किया जा रहा है। कुछ संचालनकर्ता ऐसे हैं, जिन्होंने कई हजार वर्ग फिट जमीन किराए पर ले रखी है और उसकी ऊंची बाउंड्रीवाल कराकर यह खेल कर रहे हैं।

ई रिक्शे के दोनों दरवाजे बने मुसीबतः ई रिक्शे संचालकों ने सवारियों की सहूलियत के लिए दोनों तरफ दरवाजे बना रखे हैं। कंपनी से एक तरफ दरवाजा लगकर आता है, लेकिन बाद में फैब्रिकेटर्स से मिलकर दूसरा दरवाजा भी लगाए दे रहे हैं। इसके कारण बीच सड़क में सवारियां दोनों तरफ उतारी जा रही हैं। इससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।

Edited By: Vikas Mishra