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‘रील वाली डीएम’ से लेकर फूलों की बारिश तक, यूपी की चर्चित अफसर दिव्या मित्तल से जुड़ी 10 खास बातें

Published: Tue, 15 Sep 2026 11:37 AM (IST)Updated: Tue, 15 Sep 2026 03:52 PM (IST)

आईएएस दिव्या मित्तल का त्यागपत्र केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद वह अब प्रशासनिक सेवाओं से मुक्त हो गई हैं।

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HighLights

  1. दिव्या मित्तल का त्यागपत्र केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने स्वीकार किया।

  2. मिर्जापुर के लहुरीडीह गांव में पानी पहुंचाना बड़ी उपलब्धि।

  3. देवरिया में 'मेरा गांव, मेरा गौरव' पहल की शुरुआत की।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। यूपी कैडर की चर्चित आईएएस दिव्या मित्तल का त्यागपत्र शासन ने स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद अब वह भारतीय प्रशासनिक सेवा के समस्त कार्यभार से मुक्त हो चुकी हैं। इस संबंध में केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने त्यागपत्र स्वीकार करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

दिव्या मित्तल ने बीते 30 अगस्त को अपना इस्तीफा दिया, जिसके बाद यूपी की ब्यूरोक्रेसी और सियासत दोनों में हलचल देखने को मिली थी। आइए जानते हैं आईएएस दिव्या मित्तल से जुड़ी 10 बड़ी बातें-

कैडर की लोकप्रिय आईएएस अधिकारी

दिव्या मित्तल प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए यूपी के तीन जिलों में डीएम पद पर रह चुकी हैं। देवरिया, मिर्जापुर और संतकबीरनगर में जिलाधिकारी रहने के दौरान उन्होंने कई जनहित के कार्य किए, जिसकी वजह से वे लोकप्रिय अधिकारी बनीं।

दिव्या मित्तल की सबसे बड़ी उपलब्धि

मित्तल के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि मिर्जापुर के पहाड़ी गांव लहुरीडीह तक पानी पहुंचाने के कार्य को कहा जा सकता है। पानी की किल्लत झेल रहे इस गांव में दिव्या मित्तल के प्रयासों से आजादी के लगभग 76 साल बाद पहली बार नल से पानी पहुंचा। इस पर स्थानीय बुजुर्ग महिला दुईजी देवी ने भावुक होकर उन्हें आशीर्वाद दिया था।

देवरिया में शुरू की अनूठी पहल

देवरिया में तैनाती के दौरान दिव्या मित्तल ने ‘मेरा गांव, मेरा गौरव’ नाम से एक अनूठी पहल शुरू की थी। ग्रामीण समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से जिले के 800 से अधिक ग्राम प्रधानों को सीधे प्रशासनिक अधिकारियों से जोड़ा था।

विरोधियों ने ‘रील वाली डीएम’ कहा

सोशल मीडिया पर सरकारी कामकाज के अत्यधिक प्रचार-प्रसार के कारण विरोधियों ने उन्हें 'रील वाली डीएम' कहना शुरू कर दिया था, हालांकि उनके समर्थकों का मानना था कि इससे प्रशासन जनता के अधिक करीब आया।

सख्त फैसले लेने के साथ संवेदनशील कार्यशैली

कोरोना काल में दिव्या मित्तल संतकबीरनगर में डीएम रहीं। स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौती और विकास योजनाओं को गति देने के दबाव के बीच सख्त प्रशासनिक फैसलों के साथ उनकी संवेदनशील कार्यशैली भी चर्चा में रही। उनकी पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में बनी, जो लंबी-चौड़ी बातों के बजाय सीधे मुद्दे पर आने की अपेक्षा करती थीं।

बरेली में प्राधिकरण को बनाया कर्जमुक्त

दिव्या मित्तल ने फरवरी 2019 से सितंबर 2020 तक बीडीए उपाध्यक्ष का कार्यभार संभाला। इस 19 माह के कार्यकाल में उन्होंने बीडीए पर लदे 32 करोड़ से अधिक के सरकारी ऋण को चुकाकर प्राधिकरण को डिफाल्टर होने से बचाया।

झूले पर बैठाकर फूलों की बारिश

मिर्जापुर में डीएम पद पर रहने के दौरान भी दिव्या विकास को लेकर काफी सख्त थी। लोगों की मदद करने को लेकर भी वह खूब सुर्ख़ियों में रहीं। यही वजह थी कि जब उनका ट्रांसफर हुआ तो विदाई समारोह में उन्हें झूले पर बैठाकर फूलों की बारिश की गई।

दिव्या मित्तल ने दो किताबें लिखी

दिव्या ने खाली समय में प्रतियोगियों को पढ़ाया है और दो पुस्तकें भी लिखी हैं। हाल में ही उनकी लिखी पुस्तक ‘द क्राफ्टेड जीनियस’ प्रकाशित हुई है, जिसमें उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए अपना व्यक्तिगत अनुभव व रणनीति साझा की है।

धार्मिक आयोजनों में भी सक्रियता

दिव्या मित्तल की धार्मिक आयोजनों में रुचि देखने को मिलती है। वे धार्मिक कार्यक्रमों में वह बढ़-चढ़कर शामिल होती रही हैं। महिलाओं व युवाओं को प्रोत्साहित करने व विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता बढ़ाने में भी उनकी भूमिका प्रमुख रही।

लंदन से लौटकर IAS बनने तक का सफर

दिव्या मूलरूप से हरियाणा के रेवाड़ी की निवासी हैं, लेकिन उनका जन्म दिल्ली में ही हुआ। पढ़ाई भी दिल्ली में ही हुई। 10वीं और 12वीं के बाद दिल्ली में ही बीटेक किया और फिर आईआईएम बंगलुरू से एमबीए किया।

दिव्या और उनके पति गगनदीप सिंह की लंदन में बहुत अच्छे पैकेज पर नौकरी भी लग गई थी, लेकिन उनमें देश प्रेम इतना रहा कि दोनों इस्तीफा देकर लंदन से वापस लौटे और प्रशासनिक सेवा में शामिल हो गए।

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