लखनऊ (राज्य ब्यूरो)। सुशासन कायम करने को प्रयासरत योगी सरकार जिलों (फील्ड) में अधिकारियों की तैनाती से पहले उनकी कार्य क्षमता, आचरण, मातहतों के प्रति रवैये और उनके बारे में आम धारणा का आकलन कराने पर विचार कर रही है।

इसके लिए राज्य सरकार जल्द ही केंद्र की तर्ज पर '360 डिग्री' आकलन करने के लिए समिति गठित कर सकती है। सरकार की ओर से यह कदम उठाये जाने पर आइएएस, आइपीएस अफसरों को तैनाती से पहले एक तरह के इम्तिहान से गुजरना होगा।

प्रदेश की सरकारें आइएएस, आइपीएस, पीसीएस व पीपीएस अधिकारियों को वरिष्ठता व सत्तारूढ़ दल की पसंद के आधार पर तैनाती देती रही हैं। फिलहाल उनकी कार्य क्षमता व जनता के प्रति उनके रवैये का आकलन करने की कोई विशेषज्ञ व्यवस्था नहीं है।

सूत्रों का कहना है कि योगी सरकार इस स्थापित ढर्रे से बाहर निकलकर कमिश्नर, डीएम, एसडीएम की तैनाती से पहले उनकी छवि व कार्य क्षमता की पड़ताल कराने पर विचार कर रही है।

दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जनता दरबार' में पहुंचने वाले अधिकतर फरियादियों का यही कहना होता है कि डीएम, एसडीएम, एसपी, थानेदार ने उसके साथ न्याय नहीं किया। फरियाद नहीं सुनी गई। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाये जाते हैं। इस समस्या के निदान के लिए योगी सरकार ने अधिकारियों की तैनाती को लेकर केंद्र सरकार के फार्मूले पर अमल की दिशा में कदम बढ़ाया है।

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दरअसल नरेंद्र मोदी सरकार अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को केंद्र में तैनाती से पहले '306 डिग्री' जांच कराती है जिसमें पास होने पर केंद्र सरकार की सेवा के लिए इम्पैनल (नामित) किया जाता है, रिक्तियां होने पर तैनाती की जाती है।

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Posted By: amal chowdhury

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