IAS अफसर अभिषेक प्रकाश अब हो सकते हैं बहाल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रद किया घूसखोरी का केस
घूसखोरी के आरोप में निलंबित आईएएस अभिषेक प्रकाश की बहाली का रास्ता खुल गया है, क्योंकि उनके खिलाफ दर्ज एक ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। घूसखोरी के आरोप में निलंबित चल रहे आइएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को अब बहाल किया जा सकता है।
इस मामले में निकांत जैन के विरुद्ध पुलिस द्वारा दर्ज की किए गए मुकदमे को हाई कोर्ट ने रद कर दिया है। हालांकि रक्षा औद्योगिक गलियारे के लिए सरोजनी नगर के भटगांव में भूमि अधिग्रहण में किए गए 20 करोड़ रुपये के घोटाले में अभी भी अभिषेक प्रकाश की गर्दन पर तलवार लटक रही है।
एसईएएल सोलर पी6 प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी विश्वजीत दत्ता की शिकायत पर पिछले वर्ष 20 मार्च को सरकार ने अभिषेेक प्रकाश को निलंबित किया था। वहीं पुलिस ने उनके करीबी निकांत जैन को गिरफ्तार किया था।
इस संदर्भ में गोमती नगर थाने में दर्ज मुकदमे के आधार पर पुलिस ने निकांत जैन व अभिषेक प्रकाश पर लगे घूसखोरी के आरोप की जांच शुरू की थी, लेकिन सरकार ने जांच के लिए एसआइटी का गठन कर दिया था।
पुलिस ने एफआइआर में अभिषेक के नाम का जिक्र करने की बजाय निकांत जैंन और इन्वेस्ट यूपी के एक अधिकारी का जिक्र किया था। अब इस मामले में दर्ज मुकदमा रद्द होने के बाद अभिषेक प्रकाश की बहाली का रास्ता भी साफ हो गया है। हालांकि अभी उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।
उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विजिलेंस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच अभी भी जारी है। वहीं सरोजनी नगर के भटगांव में रक्षा औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण में किए गए 20 करोड़ रुपये के घोटाले में भी उनका नाम शामिल है।
इस मामले की जांच सरकार ने राजस्व परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष डा. रजनीश दुबे से कराई थी। अगस्त 2024 में शासन को भेजी गई 83 पन्नों की जांच रिपोर्ट में अभिषेक प्रकाश सहित 18 अधिकारियों को आरोपित बनाया था। भूमाफिया ने अधिकारियों के साथ सांठगांठ करके पट्टे भूमि को असंक्रमणीय श्रेणी की भूमि को संक्रमणीय घोषित करा लिया था।
मामले की जांच में 90 पट्टे फर्जी पाए गए थे। इनमें 11 व्यक्तियों के नाम पट्टे में दर्ज ही नहीं थे। इसके बाद भी अधिकारियों ने मालिकाना हक की जांच किए बिना ही मुआवजा वितरित कर दिया था।
पूरे प्रकरण की जांच में अभिषेक प्रकाश सहित तत्कालीन एडीएम, चार एसडीएम, चार तहसीलदार, एक नायब तहसीलदार, तीन कानूनगो व दो लेखपालों को दोषी ठहराया गया था।
इनमें से अभिषेक प्रकाश को छोड़कर बाकी आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई की जा चुकी है। जिस समय भूमि अधिग्रहण किया गया था उस समय अभिषेक प्रकाश लखनऊ के जिलाधिकारी थे।
