लखनऊ(निशांत यादव)। भारतीय सेनाओं के अफसरों को फर्जी फेसबुक अकाउंट के जरिए हनी ट्रैप करने के लिए जिस साफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया, वह चीन का है। इस ट्रोजन साफ्टवेयर के जरिए आइएसआइ सीमा पार से भारतीय सेना के अफसरों को निशाना बना रही है। यह साफ्टवेयर चीन में एंटी वायरस के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाह और जबलपुर में तैनात ले. कर्नल को हनी ट्रैप करने के लिए इसी साफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया। इन दोनों अधिकारियों की डिवाइस के जरिए सेना की तकनीकी विंग ने उस साफ्टवेयर का पता लगाया है।

ट्रोजन साफ्टवेयर से बनाया गया पाक में फेक फेसबुक अकाउंट

पाकिस्तान में भारतीय महिला के नाम पर बनाए गए फर्जी फेसबुक अकाउंट से पिछले साल अक्टूबर से दो अधिकारियों को हनी ट्रैप किया जा रहा था। इसमें वायुसेना ने जहां ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाह को गिरफ्तार किया था। वहीं, जबलपुर में सेना की तकनीकी विंग ने छापेमारी कर यहां तैनात एक ले. कर्नल को पकड़ा था। ले. कर्नल के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिवाइस को जांच के लिए फारेंसिक लैब भेजा गया। मामले की जांच कर रही तकनीकी विंग ने जब दोनों अधिकारियों की डिवाइस जांचीं तो पता चला कि पाकिस्तान के जिस आइपी नंबर पर फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाया गया है। उसे बनाने और संचालित करने के लिए ट्रोजन साफ्टवेयर का इस्तेमाल हो रहा है। इस साफ्टवेयर की वजह से ही सुरक्षा एजेंसियों को फेसबुक अकाउंट को पकड़ने में पांच महीने लग गए। फिलहाल जांच एजेंसियों ने ट्रोजन साफ्टवेयर को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है।

साल 2014 में भी लग चुकी है सेंध

ट्रोजन साफ्टवेयर के जरिए सीमा उस पार गोपनीय सूचनाएं भेजने का मामला इससे पहले भी सामने आ चुका है। साल 2014 में हिमाचल प्रदेश में आइएसआइ एजेंट आसिफ पकड़ा गया था। जिसने मेरठ में तैनात एक जवान को ट्रोजन साफ्टवेयर इंस्टाल किया हुआ लैपटॉप दिया था। हैदराबाद में पकड़े गए सेना के जवान पीके पोद्दार ने भी ट्रोजन साफ्टवेयर का इस्तेमाल कर यूनिट फार्मेशन की जानकारियां भेजी थी।

Posted By: Jagran

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