लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है। ऐसे में अयोध्या में पांच अगस्त को होने जा रहा श्रीराम मंदिर निर्माण का भूमि पूजन बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के साथ ही सुरक्षा का बड़ा मसला है। ऐसे में तय किया गया है कि अन्य बड़े आयोजनों की तरह यहां सरकारी मेला या भीड़भाड़ नहीं जुटेगी। सिर्फ वही अधिकारी पांच को अयोध्या जाएंगे, जिनकी ड्यूटी लगी है। मुख्य सचिव आरके तिवारी का कहना है कि आयोजन की महत्ता है, इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोग भूमि पूजन में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए शासन यह सुनिश्चित करेगा कि शारीरिक दूरी हर हाल में बनी रहे।

अयोध्या में पांच अगस्त को होने जा रहा श्रीराम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन से सरकार का सीधा कोई वास्ता नहीं। आयोजन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का है, लेकिन भूमि पूजन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं। इसके साथ ही अयोध्या में तमाम विकास कार्य सरकार द्वारा कराए जा रहे हैं। कुछ योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी पांच अगस्त को प्रस्तावित है, इसलिए विभिन्न विभागों का जुड़ाव आयोजन से हो गया है।

अपने-अपने विभागों की योजनाओं की निगरानी और तैयारियों के सिलसिले में अधिकारी-कर्मचारियों की दौड़ लग रही है। चूंकि, कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा लगातार चल रहा है, इसलिए शारीरिक दूरी सहित अन्य उपायों पर तो शुरू से ही नजर है, लेकिन अब स्थिति और खराब होती जा रही है। लिहाजा, सुरक्षा में लगने वाले पुलिस कर्मियों को लेकर पहले ही सावधानी की गाइडलाइन जारी हो चुकी है।

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आरके तिवारी ने बताया कि आयोजन की महत्ता है, इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोग भूमि पूजन में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए शासन यह सुनिश्चित करेगा कि शारीरिक दूरी हर हाल में बनी रहे। निर्णय लिया गया है कि पांच अगस्त को सिर्फ वही अधिकारी-कर्मचारी अयोध्या जाएंगे, जिनकी ड्यूटी लगाई गई है। कार्यक्रम के दौरान भी हेल्थ प्रोटोकॉल का पालन कराया जाएगा।

Posted By: Umesh Tiwari

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