लखनऊ, जेएनएन। यूपी के वाशिंदों पर हाईब्लड प्रेशर का दबाव चल रहा है। हर आयुवर्ग के लोग उच्च रक्तचाप के चपेट में है। बावजूद, वह बीमारी से अनजान हैं। ऐसे में धीरे-धीरे व्यक्ति गंभीर रोगों की चपेट में आ रहा है।इंडियन सोसाइटी ऑफ हाइपरटेंशन द्वारा  मई 2018 से स्क्रीनिंग प्रोग्राम चलाया गया। इसके नेशनल कॉर्डीनेटर डॉ. अनुज महेश्वरी ने मुताबिक देश में कुल 52 सेंटर बनाए गए थे।

वहीं यूपी में लखनऊ, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, अयोध्या, मुरादाबाद सेंटर बनाए गए। इस दरम्यान देश भर में एक लाख 87 हजार के करीब लोगों की स्क्रीनिंग की गई। वहीं यूपी में 59 हजार व लखनऊ के 18 हजार लोगों का ब्लड प्रेशर चेक किया गया। ऐसे में देश में 31 फीसद लोग, यूपी में 34.8 फीसद लोग उच्च रक्तचाप के शिकार मिले। वहीं लखनऊ के 34.2 फीसद रोगी उच्चरक्तचाप से पीडि़त पाए गए। वहीं 2019 की स्क्रीनिंग फिर शुरू कर दी गई है।

50 फीसद हार्ट अटैक का कारण हाइपरटेंशन
लोहिया अस्पताल डॉ. संदीप चौधरी के मुताबिक विश्व में कुल मौतों का 35 फीसद कारण वस्कुलर डिजीज हैं। इसमें हार्ट अटैक व स्ट्रोक का ग्राफ सबसे ऊपर है। वहीं इन दोनों बीमारियों का मुख्य कारक हाइपरटेंशन है। 

'व्हाईट कोट' हाइपरटेंशन से बचें
डॉ. संदीप चौधरी के मुताबिक डॉक्टर अक्सर मरीज के आते ही रक्तचाप मापने लगते हैं और उसी के आधार पर समस्या का आकलन करते हैं, जोकि गलत है। मरीज डॉक्टर के पास आते समय व्हाईट कोट हाईपरटेंशन का शिकार होता है, यानि की वह डॉक्टर को देखकर और घबराया हुआ होता है। ऐसे में डब्ल्यूएचओ की गाइड लाइन का पालन करना चाहिए। इसमें डॉक्टर मरीज को पांच मिनट तक बैठाकर उससे दूसरी बातें करें, फिर अलग-अलग परस्थितियों में उसका तीन बार रक्तचाप मापे, तभी समस्या का सही आंकलन किया जा सकता है। 

सर्वे में यह भी मिला फैक्ट  

  • 32 फीसद लोग 55 वर्ष से अधिक आयु के बीमारी की चपेट में 
  • 16.65 फीसद लोग 35 से 55 वर्ष के बीच के बीमारी की गिरफ्त में
  • 05 फीसद लोग 18 से 35 वर्ष के चपेट में 

कार्य क्षेत्र के हिसाब से बीमारी का असर

  • सुविधाजनक नौकरी करने वाले  (व्हाइट कालर पीपुल) 33.3 लोग बीमारी की गिरफ्त में
  • क्लर्क आदि लेखा-जोखा वाली नौकरी करने वाले (ब्लू कालर पीपुल) 19.86 फीसद लोग बीमारी की चपेट में
  • 19.73 फीसद घरेलू महिलाएं बीमारी की चपेट में
  • 14 फीसद बिजनेसमैन बीमारी की चपेट में
  • रिटायर्ड लाइफ बिता रहे 9.7 लोग बीमारी की चपेट में
  • 3.89 फीसद छात्र-छात्राएं हाइपर टेंशन का शिकार

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Posted By: Anurag Gupta