लखनऊ, जेएनएन। कोरोना वायरस के संकट के बीच मौसम की दगाबाजी बार-बार अन्नदाता की उम्मीदों पर पानी फेर रही है। मार्च में रिकॉर्ड तोड़ बारिश और अप्रैल - मई में ओलावृष्टि ने किसानों का गणित ही बिगाड़ दिया है। सोमवार को दोपहर बाद आसमान को काले बादलों ने अपनी गिरफ्त में ले लिया तेज गड़गड़ाहट के साथ कुछ ही देर में ओले गिरने लगे। ओलों का आकार काफी बड़ा था। हजरतगंज सहित ट्रांस गोमती इलाके में तेज बारिश हुई व कई इलाकों में ओले गिरे इससे मौसम सुहावना हो गया। लगातार लगभग 20 -25 मिनट तक  रुक रुक कर ओले गिरने वह बारिश का सिलसिला जारी रहा कुछ इलाकों में तेज आंधी भी आई।

मौसम विभाग ने दिए थे बारिश के संकेत

मौसम विभाग द्वारा पहले ही इस बात का अनुमान लगाया गया था कि प्रदेश में एक बार फिर मौसम गड़बड़ा सकता है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक जेपी गुप्ता बताते हैं कि अगले 2 दिन ऐसा ही मौसम रहने की उम्मीद है ।उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर पर जहां पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। वहीं हरियाणा के पास कम दबाव का क्षेत्र है जिसके चलते प्रदेश में आंधी पानी के साथ ओले गिरने की उम्मीद है । उन्होंने बताया कि मंगलवार को भी कुछ जगहों पर तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि व बारिश की संभावना है हालांकि लखनऊ में हल्की बारिश की उम्मीद जताई गई है।

 

राजधानी में सोमवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 3 डिग्री कम थ्री सिक्स पॉइंट 3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया वहीं न्यूनतम तापमान 4 डिग्री रहा बारिश के चलते हैं उमस काफी बढ़ गई मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को भी हल्की बारिश की उम्मीद है।

 

बागबान निराश हुए

उधर ,आम की नकदी फसल को लेकर बागवानों और किसानों का गणित पर मौसम ने पानी फेर दिया। गेहूं की कटाई मड़ाई पूरी हो चुकी है, लेकिन आम की फसल को लेकर बागवान आशा लगाए बैठे हैं। सोमवार को दोपहर बाद तेज हवाएं चलने से जहां आम गिर गए वहीं बारिश और ओला ने नुकसान को दो गुना कर दिया। उप कृषि निदेशक डॉ.सीपी श्रीवास्तव ने बताया कि माल, मलिहाबाद और काकोरी में तेज हवा के साथ बारिश और ओला पड़ा है। आम और फूलों की खेती को नुकसान हुआ है। एक साथ बारिश या ओला न पड़ने से पूरे इलाके में नुकसान का अनुमान नहीं हुआ है। हालांकि मलिहाबाद के कुछ बागवानों ने हवा चलने और ओले से भारी नुकसान होने की बात कही है। गोसाईगंज, सरोजनीनगर, बख्शी का तालाब में बारिश नहीं हुई है।

 

 

बारिश से रोग होने की संभावना होगी कम

एक ओर जहां तेज हवाओं ने आम की फसल को नुकसान पहुचाया है तो शेष बचे आम के लिए यह बारिश वरदान साबित हुई है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी धनंजय सिंह ने बताया कि आम में काले धब्बे और काली मक्खी रोग लगने लगा है। इसे राेकने के लिए कीटनाशक के साथ ही बाग की सिंचाई जरूरी है। बारिश होने से आम की फसल को फायदा हुआ है। रोग की संभावना कम होगी। उन्होंने बताया कि काला दाग और आम का फटना जारी है, ऐसे में बागवान छह से आठ ग्राम बोरेक्स को एक लीटर पानी में घोलकर पेड़ पर छिड़काव करें। इसके अलावा फल मक्खी को रोकने के लिए मिथाइल यूजीनॉल का प्रयोग बागवान करके आम की फसल को बचा सकते हैं।

Posted By: Divyansh Rastogi

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