लखनऊ (जेएनएन)। मथुरा के जवाहरबाग कांड का मास्टर माइंड और कथित सत्याग्रहियों का मुखिया रामवृक्ष यादव दो जून की रात ही ऑपरेशन में मारा गया था।

मथुरा के पोस्टमार्टम गृह में उसकी लाश अज्ञात के रूप में पड़ी रही। कल शाम जेल में बंद कथित सत्याग्रहियों में से एक ने सभी शवों की तस्वीर से उसकी शिनाख्त की। परसों मथुरा पहुंचे डीजीपी जावीद अहमद ने इसकी आशंका जाहिर की थी। इसके बाद कल प्रशासन ने रामवृक्ष और उसके तीन साथियों पर पांच-पांच हजार का इनाम घोषित किया। शाम को डीजीपी ने ट्वीट के जरिए रामवृक्ष के मारे जाने की जानकारी दी।

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दो जून की शाम जवाहर बाग में हुई कार्रवाई में दो अधिकारियों के शहीद होने के साथ 22 कथित सत्याग्रही भी मारे गए थे। इसके बाद तीन की रात तक तीन और लोगों की मौत हो गई। शिनाख्त न होने के कारण सभी शवों को पोस्टमार्टम गृह में रखा गया था। शनिवार को पुलिस ने अज्ञात शवों की शिनाख्त के लिए तस्वीरें खिंचवाकर प्रयास शुरू किए। दोपहर में प्रशासन ने रामवृक्ष और उसने तीन साथियों पर पांच-पांच हजार का इनाम घोषित कर दिया। शाम को सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी और एसओ सदर प्रदीप कुमार ने मारे गए कथित सत्याग्रहियों की शिनाख्त की कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक जेल में बंद रामवृक्ष के एक साथी कन्नौज निवासी हरनाथ सिंह ने तस्वीर के जरिए रामवृक्ष की शिनाख्त कर दी। बताया जा रहा है कि रामवृक्ष को गोली लगी है और उसका शव बुरी तरह झुलसी हुई हालत में है। शिनाख्त के बाद अब पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जाएगी।

जवाहर बाग में कथित सत्याग्रह को हवा देने वाला रामवृक्ष यादव पुलिस कार्रवाई से बचने को टूटी हुई बाउंड्रीवाल से निकलकर भाग रहा था, तभी जेल पुलिस के आवासों में रहने वाली महिलाओं ने उसे दबोच लिया। उसे जमकर धुना। पिटाई के बाद वह चंगुल से निकलकर भागने लगा, लेकिन रात में कहीं मर गया, मगर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो रही थी। हालांकि डीजीपी जावीद अहमद ने यह जरूर कहकर बहुत कुछ संकेत दे दिया था कि मरने वालों में रामवृक्ष हो सकता है।

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गाजीपुर के रायपुर बाघपुर मठिया निवासी रामवृक्ष यादव हजारों समर्थकों के साथ जवाहरबाग में दो साल से कब्जा किए था। गुरुवार को पुलिस कार्रवाई के दौरान एसपी सिटी और एसओ फरह की मौत के बाद उसे अपने मारे जाने का आभास हो गया था। ऐसे में वह सारे कागजों में आग लगाने के बाद रामवृक्ष यादव जवाहर बाग की टूटी बाउंड्रीवाल से निकलकर बाहर भागने लगा था। इसके बाद वह महिलाओं के हत्थे चढ़ गया। सूत्रों का कहना था कि इसके बाद वह जवाहर बाग में अंदर की ओर भागा था। इसी दौरान सिलेंडर में विस्फोट से झोपडिय़ों में लगी आग में जलकर खाक हो गया था।

एक जून को कटवाई थी दाढ़ी

रामवृक्ष का चेहरा भले ही अनजान न हो, मगर ऑपरेशन को लेकर उसने चेहरा छुपाने की तैयारी कर ली थी। रामवृक्ष ने एक जून को उसने दाढ़ी कटवा दी थी, ताकि आम लोग उसे पहचान न पाएं और हालात बिगडऩे पर वह सकुशल निकल सके।

जिंदा हैं या मारे गए तीन साथी

जवाहरबाग में दशहत का ठिकाना चला रहे स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह और सुभाष सेना के स्वयं भू मुखिया रामवृक्ष यादव के तीन कमांडर और थे। सुरक्षा कमांडर चंदन बोस, वीरेश यादव व राकेश गुप्ता पूरा नेटवर्क संभालते थे। दो जून की कार्रवाई के बाद इनकी भी कोई जानकारी नहीं है। इनके मारे जाने की आशंका परसों डीजीपी ने जताई थी। प्रशासन ने रामवृक्ष और उसने तीन साथियों पर पांच-पांच हजार का इनाम घोषित कर दिया। शाम को सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी और एसओ सदर प्रदीप कुमार ने मारे गए कथित सत्याग्रहियों की शिनाख्त की कार्रवाई की।

रामवृक्ष के सेनानी का दर्जा भी होगा समाप्त

मथुरा कांड में कुख्यात रामवृक्ष यादव के मारे जाने की पुष्टि से पहले जिला प्रशासन ने उसकी लोकतंत्र रक्षक सेनानी पेंशन रोकने की कार्रवाई शुरू कर दी थी। अब उसके सेनानी का दर्जा भी समाप्त करने की कवायद हो रही है। जय गुरुदेव का पूर्व चेला रामवृक्ष गाजीपुर के मरदह थाना क्षेत्र के रायपुर बाघपुर मठिया गांव का रहने वाला था। राजनीतिक महत्वाकांक्षा के तहत वह लगातार सक्रिय रहा। इसी के चक्कर में वह आपातकाल में गिरफ्तार होकर मीसा के तहत जेल में भी बंद रहा। सपा सरकार ने आपातकाल के बंदियों को राजनीतिक बंदी और उत्पीडि़त मानकर लोकतंत्र रक्षक सेनानी पेंशन देनी शुरू की। इसका लाभ रामवृक्ष को भी मिला और वह लोकतंत्र रक्षक सेनानी पेंशन पाने लगा।

Posted By: Nawal Mishra