लखनऊ, जेएनएन। राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि पहले स्वतंत्रता संग्राम को अंग्रेजों से बगावत का नाम दिया गया था, लेकिन देशवासियों के लिए स्वतंत्रता संग्राम एक आंदोलन था। 1857 स्वतंत्रता संग्राम के बाद यहां के हिंदू, मुस्लिम, सिख व ईसाई समुदाय के लोग एक साथ देश को आजाद कराने के लिए अंग्रेजों से लड़े थे। यही कारण है कि लखनऊ में सामाजिक सौहार्द अधिक दिखाई देता है। 

वह राजभवन के गांधी सभागार में आयोजित पुस्तक के लोकार्पण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। मंगलवार को राज्यपाल राम नाईक ने लेखक डॉ. राकेश कुमार बिसारिया की लिखी पुस्तक 'लखनऊ मंडल में 1857 का स्वतंत्रता संग्राम' का लोकार्पण कर देश की आजादी के अमर शहीदों को नमन किया। राज्यपाल ने कहा कि 1857 का स्वतंत्रता संग्राम देश की आजादी का प्रथम संग्राम था। अंग्रेजों ने इस प्रथम संग्राम को बगावत का नाम दिया, जिसे वीर सावरकर ने प्रमाणित किया कि यह बगावत नहीं देश की आजादी का पहला संघर्ष है। इतिहास वास्तव में साहित्य नहीं है, बल्कि प्रमाणिकता से समाज के सामने सच्चाई लाने का काम करता है।

इतिहास से ही भविष्य बनता है, इसलिए ऐतिहासिक गलतियों से सबक लेकर इन्हें न दोहराने का प्रयास होना चाहिए। इतिहास लिखने में लेखक सत्य से खिलवाड़ नहीं कर सकता। इतिहासकार डॉ. योगेश प्रवीन ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन को लेकर जितना भी लिखा गया है वह अंग्रेजों ने लिखा है, जिसमें आम जनता की मूल भावनाओं को शामिल नहीं किया गया। इस पुस्तक से पाठकों को स्वतंत्रता संग्राम के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी। नवाब मीर जाफर अब्दुल्ला ने अवध में स्वतंत्रता संग्राम की शुरूआत, बेगम हजरत महल का योगदान और वाजिद अली शाह की गिरफ्तार की घटना का उल्लेख किया। लेखक डॉ. राकेश कुमार बिसारिया ने अपनी पुस्तक के बारे में विस्तार से रोशनी डाली। कहा कि आज बचपन का सपना साकार हो गया। 

15 अगस्त से शुरू होगा लाइट एंड साउंड शो

राज्यपाल ने संग्राम की साक्षी होने के नाते रेजीडेंसी का उचित रखरखाव एंव संवर्धन होना चाहिए। 13 अगस्त 2015 को वह पहली बार रेजीडेंसी आए थे, तब उन्होंने लाइट एंड साउंड शो शुरू करने का सुझाव दिया था, आगामी 15 अगस्त से स्वतंत्रता संग्राम की गवाह रही रेजीडेंसी में लाइट एंड साउंड शो शुरू होगा। हालांकि, तब तक मेरा कार्यकाल खत्म हो जाएगा, लेकिन मैं लाइट एंड साउंड शो देखने आऊंगा। 

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Posted By: Divyansh Rastogi

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