मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

लखनऊ। उम्र के जिस पड़ाव पर ज्यादातर लोग आराम करना चाहतें है उस पर भी राम नाईक अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैैं। खांटी भाजपाई और दिग्गज राजनेता रहे 85 वर्षीय नाईक कहते हैं कि उन्हें काम करने का नशा (वर्क अल्कोहलिक) है।

उनको काम करने से आनंद मिलता है और वही उन्हें और ज्यादा काम करने की प्रेरणा देता है। बतौर राज्यपाल पांच वर्ष तक अपनी भूमिका में पूरी ऊर्जा के साथ सक्रिय रहे नाईक 29 जुलाई को प्रदेश से विदा हो रहे हैं। राजभवन छोडऩे से पहले दैनिक जागरण के राज्य ब्यूरो प्रमुख अजय जायसवाल से बातचीत में राम नाईक ने बड़ी बेबाकी सेे कहा कि राज्यपाल जैसे सांविधानिक पद से हटते ही वह तो फिर भाजपा ज्वाइन कर राजनीति में सक्रिय होने जा रहेे हैैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब वह कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे।

प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश-

ø क्या कुछ न कर पाने का मलाल है?

-मलाल किसी तरह का नहीं बल्कि संतुष्टि इस बात की है कि पांच वर्ष पहले राज्यपाल की कुर्सी संभालते हुए जो कुछ कहा था उसे काफी हद तक पूरा करने में सफल रहे हैं। मुम्बई जाकर मैं राज्यपाल रहते यहां के अपने सभी तरह के अनुभवों को समेटते हुए जल्द ही चरैवेति पार्ट-2 पुस्तक लिखने की तैयारी करूंगा।

ø सबसे अच्छी पारी कौन सी मानते हैं?

-यह तो जनता तय करती है लेकिन बताना चाहता हूं कि मैं पहले बेस्ट विधायक फिर बेहतर सांसद और अच्छा पेट्रोलियम मंत्री माना जाता रहा हूं। विनम्रतापूर्वक कह सकता हूं राज्यपाल के तौर पर भी मेरी पारी अच्छी रही है।

ø दूसरी सियासी पारी कब शुरू कर रहे हैं?

-भाजपा के प्रति निष्ठा और हौसला जताते हुए नाईक कहते हैं कि मैं तो यहां से 29 को मुंबई जा रहा हूं। 30 को महाराष्ट्र प्रदेश के भाजपा कार्यालय जाकर पार्टी की सदस्यता लूंगा। पार्टी मेरे योग्य जो कार्य समझेगी मैैं उसे करता रहूंगा। 2004 का चुनाव हारने और राज्यपाल बनने से पहले तक मैं पार्टी में सक्रिय रहा हूं।

ø 85 वर्ष की उम्र में भी आप इतने सक्रिय.....?

-मुझे काम करने का नशा (वर्क अल्कोहलिक) है। काम करने से आनंद मिलता है, और वही आनंद मुझे और काम करने की प्रेरणा देता है। कार की बैट्री की तरह। जैसे कार चलने पर बैट्री चार्ज होती है और वही बैट्री फिर इंजन को चलाती है। जीवन के अंतिम क्षण तक मैं यूं ही सक्रिय रहूंगा।

ø सबसे बड़ी उपलब्धि क्या मानते हैं ?

- पूरे जीवन की दृष्टि से तो मैैं कुष्ठ पीडि़तों और मछुवारों के लिए किए गए कार्यों को बड़ी उपलब्धि मानता हूं।

ø उत्तर प्रदेश, राजभवन और यहां वाले याद आएंगे?

- क्यों नहीं, वह कहते हैैं न कि पानी रे पानी तेरा रंग कैसा, जिसमें मिला दो उस रंग जैसा। वैसे ही यहां आकर मैं यूपी वाला बन गया और यहां से जाकर फिर मुम्बई वाला बन जाऊंगा लेकिन किसी को भूल कैसे सकता हूं? पहली बार किसी राजभवन में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगाई गई हैै। यहां राजभवन में 20 गाय हैैं उनका शुद्ध दूध मिलता रहा। मुम्बई में तो दूसरी जगह का ही दूध मिलेगा।

ø सबसे खराब क्या लगता है?

- संसद से लेकर विधानसभाओं में चर्चा के गिरते स्तर से पीड़ा होती है। मेरा मानना और अनुभव है कि विपक्ष में रहते, वेल में आए बिना भी अपनी बात को रखा जा सकता है और उसे सरकार सुनती भी है।

ø कभी गुस्सा आता है क्या?

-गुस्सा आता है लेकिन मन के बाहर नहीं। गुस्से को शब्दों से नहीं व्यक्त करता हूं। मेरी नपसंदी को लोग समझते है और सकारात्मक दृष्टिकोण से उसमें सुधार करते हैैं।

ø आप छात्रसंघ चुनाव को लेकर चिंता जताते रहे हैं ?

कुलपतियों व सरकार को छात्रसंघ चुनाव से तनाव की आशंका है लेकिन मेरा साफ मानना है कि छात्रसंघ चुनाव होने चाहिए। चुनाव न होने से युवाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास नहीं हो पा रहा है।

ø अखिलेश और योगी में क्या खूबी दिखी?

- समाजवादी पार्टी में अंतरद्वंद होते हुए भी अखिलेश यादव काम करने की कोशिश करते रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो तय करते हैं, उसमें पूरी क्षमता लगाकर सफलता हासिल करते हैं।

ø फिर कब उत्तर प्रदेश आएंगे?

- दो कारणों से मैैं जल्द यहां फिर आ सकता हूं। पहला चार हजार कुष्ठ पीडि़तों को 46 करोड़ रुपये से पक्के घर देने की परियोजना के शुभारंभ के मौके पर और दूसरा चरैवेति चरैवेति के कश्मीरी, बांग्ला और तमिल भाषाओं के अनुवाद के लोकार्पण के अवसर पर।

ø विवादों में फंसे आजम खां के निशाने पर आप भी रहे?

- जी, विधानसभा में आजम खां ने मेरे बारे में असंसदीय शब्द कहे तो मैंने अध्यक्ष व मुख्यमंत्री को लिखा लेकिन तब उसे सिर्फ कार्यवाही से हटाया गया। आजम खां के खिलाफ शिकायतों पर भी तब कुछ नहीं हुआ लेकिन सामने तो सब कुछ आना ही था। संस्कृत के एक श्लोक के माध्यम से कहना चाहता हूं कि 'घड़े फोड़कर, कपड़े फाड़कर या गधे के ऊपर चढ़कर, कुछ लोक किसी भी तरह, कुछ भी करके लोकप्रिय होना चाहते हैं। इसी तरह गीता के अध्यक्ष दो (34) में एक श्लोक है कि 'और सब लोग तुम्हारी बहुत समय तक रहने वाली अकीर्ति की भी चर्चा करेंगे और प्रतिष्ठित व्यक्ति के लिए अकीर्ति मरण से भी बढ़कर है।' 

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Posted By: Dharmendra Pandey

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