लखनऊ, जेएनएन। राज्यपाल राम नाईक ने राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को आईना दिखाकर कहा कि फर्जी अंकपत्रों व उपाधियों और नकल के गोरखधंधे से जहां विश्वविद्यालयों की बदनामी होती है, वहीं प्रदेश की छवि भी धूमिल होती है। इन पर नकेल कसने के लिए उन्होंने ठोस कदम उठाने की जरूरत बतायी। दो टूक लहजे में कहा कि ऐसे विषय किसी हालत में बर्दाश्त नहीं किये जाएंगे। वह रविवार को राजभवन में राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति सम्मेलन की बतौर कुलाधिपति अध्यक्षता कर रहे थे।

विश्वविद्यालयों में सुधार की काफी गुंजायश

प्रदेश में उच्च शिक्षा के पटरी पर आने और सत्र नियमित होने पर संतोष जताने के साथ वह यह कहने से नहीं चूके कि विश्वविद्यालयों में अब भी सुधार की काफी गुंजायश है। शैक्षिक गुणवत्ता का विषय सभी राज्य विश्वविद्यालयों के लिए एक चुनौती है जिसे साफगोई से स्वीकार करते हुए बेहतर प्रदर्शन करने की आवश्यकता है। उन्होंने चिंता जतायी कि देश के प्रथम 100 विश्वविद्यालयों में उत्तर प्रदेश का कोई विश्वविद्यालय शामिल नहीं है। प्रतिस्पर्धा के युग में शैक्षिक गुणवत्ता को लेकर हर विश्वविद्यालय से अपनी स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए कहा और कुलपतियों से इस दिशा में काम करने का आह्वान किया। शिक्षा के साथ शोध की गुणवत्ता बढ़ाने पर भी जोर दिया।

शिक्षकों के 30 फीसद पद खाली

राज्य विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के लगभग 30 फीसद पद खाली हैं। इन पर यूजीसी के नए रोस्टर के हिसाब से नियुक्तियां होनी हैं। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में आ रहीं बाधाओं को दूर करने का निर्देश दिया। कहा कि खाली पदों को भरने के लिए योग्य ढंग से नियुक्तियां होनी चाहिये। केंद्र सरकार ने जो शिक्षा नीति प्रस्तावित की है, उस पर भी विचार किया जाना चाहिए।

उपयोगिता के आधार पर हो कोर्स का चयन

राज्यपाल ने कहा कि स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों का चयन इस यह देखकर किया जाए कि वे कितने रोजगारपरक और समाज के लिए कितने उपयोगी हैं। जिन पाठ्यक्रमों की मांग हो उनमें परिवर्तन करने के लिए नियमित रूप से विचार करने की जरूरत है।

वित्तीय संसाधन बढ़ाने के बारे में सुझाव देगी समिति

विश्वविद्यालयों में वित्तीय संसाधन बढ़ाने के लिए राज्यपाल ने कुलपतियों की तीन सदस्यीय समिति गठित की है। लखनऊ विश्वविद्यालय, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति समिति के सदस्य हैं। समिति रिपोर्ट राज्यपाल को देगी जिसे वह सुझावों सहित शासन को संदर्भित करेंगे।

पीएचडी में एकरूपता के लिए भी समिति

पीएचडी पूर्ण करने की तारीख के संबंध में विभिन्न विश्वविद्यालयों में अभी अलग-अलग व्यवस्था लागू है। इसमें एकरूपता लाने के बारे में सुझाव देने के लिए राज्यपाल ने एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपतियों की दो सदस्यीय समिति बनाई गई है।

छात्राओं ने लहराया परचम

राज्यपाल ने इस बात पर प्रसन्नता जतायी कि प्रदेश में उच्च शिक्षा में छात्राओं की हिस्सेदारी 2014-15 में 40 प्रतिशत थी जो अब बढ़कर 56 प्रतिशत हो गई है। शैक्षिक सत्र 2018-19 में सम्पन्न हुए दीक्षांत समारोह में 66 प्रतिशत पदक छात्राओं के पक्ष में गए हैं।

इन विषयों पर हुई चर्चा

कुलपति सम्मेलन के एजेंडा में परीक्षा परिणामों के घोषणा की ताजा स्थिति, वर्ष 2019-20 के शैक्षिक कैलेंडर निर्धारण, नकल तथा फर्जी अंकतालिका व उपाधियों पर नियंत्रण, नवीन नैक मूल्याकंन प्रक्रिया का अनुपालन, नये नियमों के परिप्रेक्ष्य में विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया, शोध व शोध पीठ की स्थापना, विश्वविद्यालयों के बढ़ते वित्तीय भार के सापेक्ष वित्तीय संसाधनों का सृजन जैसे विषय शामिल थे जिन पर विशेष रूप से चर्चा हुई। सम्मेलन में ई-लर्निंग, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार शैक्षिक दिवस, प्रवेश, परीक्षाफल, शिक्षकों की उपलब्धता, आधारभूत सुविधाएं, ई-लाईब्रेरी, अभिलेखों के डिजिटाइजेशन आदि पर भी मंथन हुआ जिसमें कुलपतियों ने विचार व्यक्त किए।

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Posted By: Umesh Tiwari

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