लखनऊ, जेएनएन। राजधानी में एक बीए प्रथम वर्ष की छात्रा ने 12वीं मंजिल की छत से छलांग लगा दी। छात्रा की चींख सुनकर बिल्डिंग का सिक्योरिटी गार्ड भागते हुए पहुंचा। खून से लथपथ हाल में छात्रा को देख उसने परिजनों को सूचना दी। वहीं पुलिस ने मौके पर पहुंच शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजवाया। मृतका के पिता ने बताया कि बेटी डिप्रेशन की बीमारी से ग्र्रस्त थी। उसका काफी समय इलाज भी चल रहा था। उधर, पुलिस मामले की जांच में लगी है। 

ये है पूरा मामला 
मामला पीजीआइ थाना क्षेत्र के वृंदावन कालोनी सेक्टर 18 स्थित हिमालयन इंक्लेव का है। यहां के फेज तीन में 12वीं मंजिल की छत से दोपहर करीब 12.30 बजे कूदकर बीए प्रथम वर्ष की छात्रा अंशू ने आत्महत्या कर ली। मूल रुप से बिहार निवासी मृतका के पिता शैलेन्द्र मणि ने फ्लैट किराए पर लिया था।  मृतका यहां पिता शैलेंद्र, मां रीता, बड़ा भाई अंकित, भाभी सोनी, छोटी बहन नीशू के साथ रह रहती थी। मृतका का भाई अंकित पीजीआइ में संविदा पर नौकरी करता है। पिता शैलेंद्र व उनके रिश्तेदार सुरेंद्र ने बताया कि अंशू दोपहर में 12 बजे तक घर के अंदर ही सबके साथ थी। इसी बीच सब आराम करने के लिए कमरों में लेटने गए। तभी अंशु बिना किसी को बताए बिल्डिंग की छत पर पहुंच गई और वहां से छलांग लगा दी।

चीख सुनकर गार्ड भागकर पहुंचा
तेज आवाज सुनकर गार्ड राकेश मिश्रा भागकर उसके पास पहुंचा। खून से लथपथ हाल में छात्रा को देख उसने परिजनों को सूचना दी। नीचे पहुंचने तक अंशू ने दम तोड़ दिया था। इसके बाद परिजनों व गार्ड ने पुलिस को सूचना दी। वहीं पुलिस ने मौके पर पहुंच शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजवाया। 

डिप्रेशन की बीमारी का चल रहा था इलाज
पिता शैलेंद्र ने बताया कि बेटी डिप्रेशन की बीमारी से ग्र्रस्त थी। उसका काफी समय इलाज भी चल रहा था। गुरुवार शाम को ही बेटी वृंदावन कालोनी सेक्टर 10 में रहने वाले मामा सुरेंद्र के घर से दस दिन रहकर लौटी थी। 

क्या कहना है पुलिस का? 
इंस्पेक्टर अशोक कुमार सरोज ने बताया कि आत्महत्या के कारण का अब तक पता नहीं चला है। बीमारी से ग्र्रस्त होने की बात जांच में आई है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है, मामले की जांच चल रही है।

Posted By: Anurag Gupta