लखनऊ, जेएनएन। बलरामपुर अस्पताल के पूर्व प्रभारी व आर्थो के डाक्टर जीपी गुप्ता ड्यूटी करने के दौरान ही संक्रमित हो गए। इसके बाद वह एसजीपीजीआइ में भर्ती हुए। इस दौरान उन्होंने रोजाना दिन भर में पांच बार गरारा किया। हर बार कम से कम छह मिनट तक। उन्होंने साथ में भर्ती अन्य मरीजों को भी यही उपाया बताया। जिन्होंने भी उनकी बात मानी सभी ठीक हो गए और किसी की मौत नहीं हुई। डा. जीपी गुप्ता ने इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कोरोना मरीजों के लिए गरारा अनिवार्य किए जाने की मांग की है। उन्होंने लिखा है कि जिनको बुखार ,खांसी, गले में दर्द अभी शुरु हुआ है वे घबराएं, नहीं। प्रत्येक दो घंटे पर गर्म पानी का गरारा करें । अपने संपूर्ण परिवार की जांच कराएं। 

टेलिफोन नम्बर पर चिकित्सक से सम्पर्क कर अपनी हालत बता कर घर पर ही इलाज करें। आराम न होने पर ही चिकित्सालय में भर्ती कराएं । जिनका आक्सीजन सेचुरेशन 90 से कम हो रहा है, वे सभी दवाओं के साथ -साथ लगातार गर्म पानी से गरारा करें। 24 घंटे चार चिकित्सक की टीम ऐसे लोगों को चिकित्सीय परामर्श उपलब्ध कराएं। विभिन्न चिकित्सालयों में भर्ती मरीजों को तत्काल प्रभाव से एक थरमस जिसमें गर्म पानी की उपलब्धता , एक बड़ा मग गरारा करने के लिए हो। इन मरीजों में लगातार गरारा करने से ठीक हाने की दर का अध्ययन करके उक्त रिपोर्ट शासन को भेजी जाए। ताकि गर्म पानी से गरारे करने से इस बीमारी पर काबू पाने की बात वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित हो सके। इससे मरीजों को लाभ होगा।

चार हफ्ते आइसीयू में रहकर डाक्टर ने दी कोरोना को मात: लोकबंधु अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डा. संजीव खटवानी ने करीब चार हफ्ते तक एसजीपीजीआइ के आइसीयू में रहे और कोविड को मात दी। वह कहते हैं कि 31 मार्च को मैं कोविड पाॅजिटिव हुआ था। मैंने खुद को आइसोलेट कर लिया, पर बुखार तेज होता गया। दो अप्रैल को पीजीआइ में भर्ती हुआ। हालत बिगड़ने पर आइसीयू और फिर बाईपेप सपोर्ट पर रखा गया। एक सप्ताह तक मैं बाईपेप सपोर्ट पर रहा। इस दौरान सभी दवाइयां दी जाती रहीं। 15 अप्रैल से मेरी हालत कुछ ठीक होने लगी। 18 अप्रैल को मैं बाईपेप सपोर्ट से बाहर आ गया। इसके बाद मुझे आइसोलेशन वार्ड में रखा गया, जहां एंटीबायोटिक कोर्स पूरा हुआ। मैं बेहतर महसूस करने लगा, पर मेरा आरटीपीसीआर लगातार पाॅजीटिव आ रहा था। 27 अप्रैल को मशीन कोर्स पूरा हुआ और मैंने होम क्वारंटाइन के लिए आग्रह किया। मेरे डिस्चार्ज से पहले आखिरी सैंपल भेजा गया, जो नेगेटिव आया। वह कहते हैं कि इस दौरान इलाज के साथ हौसला बहुत मायने रखता है। मैंने हौसला नहीं तोड़ा। इसलिए कोविड से जंग जीत सका।