लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन स्कीम के तहत उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के तट पर स्थित पवित्र स्थलों को चिन्हित करते हुए गंगा सर्किट के रूप में एक नए पर्यटन परिपथ का विकास किया जाना प्रस्तावित है। स्पिरिचुअल सर्किट के तौर पर विकसित किए जाने वाले इस पर्यटन परिपथ की अनुमानित लागत 100 करोड़ रुपये है।

शुक्रवार को केंद्र सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल और प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नीलकंठ तिवारी द्वारा पर्यटन की केंद्र पोषित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान गंगा परिपथ के बारे में प्रस्तुतिकरण किया गया। पर्यटन निदेशालय के सभागार में हुई इस बैठक में बताया गया नदी के किनारे स्थित इन पर्यटन स्थलों पर वर्ष पर्यंत लाखों की संख्या में पर्यटक व श्रद्धालु आते हैं। गंगा सर्किट के विकास से न केवल इन पर्यटन स्थलों का सुनियोजित ढंग से विकास हो सकेगा, बल्कि इन क्षेत्रों में जलमार्ग के माध्यम से नौका विहार, वाटर स्पोर्ट्स और जल परिवहन का भी लाभ मिलेगा।

बैठक के बाद दोनों मंत्रियों ने बताया कि स्वदेश दर्शन स्कीम के तहत 298.84 करोड़ रुपये की लागत से अयोध्या में नई योजना प्रस्तावित की गई है। इसमें सरयू नदी के किनारे नौ किलोमीटर घाटों का निर्माण व पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाओं का विकास जैसे कार्य कराए जाएंगे। इस परियोजना से अयोध्या में आने वाले तीर्थ यात्रियों की यात्रा सुगम हो सकेगी।

स्वदेश दर्शन स्कीम की नई योजनाओं में बौद्ध सर्किट के तहत कौशांबी व संकिसा का पर्यटन विकास, स्पिरिचुअल सर्किट के अंतर्गत गंगा सर्किट, नैमिषारण्य व मिश्रिख का पर्यटन विकास, हेरिटेज सर्किट के तहत क्रांति पथ (सन 1857), हस्तिनापुर (द्रोपदेश्वर, पांडेश्वर महादेव, द्रौपदी घाट), ईको टूरिज्म सर्किट के तहत मीरजापुर, चुनार, सीतामढ़ी, सोनभद्र तथा बुंदेलखंड सर्किट का पर्यटन विकास प्रस्तावित है, जिसकी कुल अनुमानित लागत 497.99 करोड़ रुपये है।

केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने स्वदेश दर्शन स्कीम की नई योजनाओं के प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी दिलाने का आश्वासन दिया। भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को श्रावस्ती के संरक्षित धरोहरों के बारे में सात दिन के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया। उन्होंने वर्तमान में चालू सभी केंद्रीय योजनाओं के कार्यों को नवंबर तक प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने का निर्देश दिया।

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