लखनऊ, जेएनएन। आइजीआरएस से शिकायत मिलने पर एफएसडीए की टीम ने बुधवार को केजीएमयू व क्वीनमेरी की अमृत फार्मेसी पर छापा मारा। छापे में भारी अनियमितताएं सामने आईं। नारकोटिक्स ग्रुप की दवाएं नियम विरुद्ध बेची जा रही हैं। हर महीने लाखों की दवा की खरीद-फरोख्त हो रही है। इसका ब्योरा फार्मेसी जांच टीम को उपलब्ध नहीं करा पाई। टीम ने नारकोटिक्स की दवाओं के सेल एंड परचेज का रिकॉर्ड मांगा। केजीएमयू के अलावा ठाकुरगंज की एक फार्मेसी में भी छापा मारा गया। तीनों जगहों से कुल पांच सैंपल लिए गए।

जनसुनवाई पोर्टल पर मिली शिकायत के आधार पर फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफएसडीए) की एक टीम ने केजीएमयू की ओल्ड ओपीडी स्थित अमृत फार्मेसी का दोपहर करीब सवा ग्यारह बजे निरीक्षण किया। टीम की सदस्य माधुरी सिंह ने बताया कि फार्मेसी में दवाओं का भंडारण सही से नहीं किया जा रहा था। दवाओं की डंपिंग काफी ज्यादा थी। दवाओं की खरीद-फरोख्त का बिल भी फार्मेसी उपलब्ध नहीं करा सकी। फार्मेसी में गंदगी भी पाई गई। साथ ही शेड्यूल्ड दवाओं का रखरखाव सही से नहीं किया जा रहा था। क्वीनमेरी स्थित फार्मेसी का भी यही हाल था। यहां शिड्यूल-एच दवाओं की बिक्री में गड़बड़ी मिली। दोनों जगह फार्मासिस्ट मौजूद थे, लेकिन प्रोपराइटर मौजूद नहीं था।

इसके अलावा ठाकुरगंज स्थित विमला मेडिकल स्टोर पर भी छापा मारा गया। यहां फार्मासिस्ट को अनुपस्थित पाया गया। कई दवाओं की बिक्री पर रोक लगाई गई। केजीएमयू से दो, क्वीनमेरी से दो व विमला मेडिकल स्टोर से एक सैंपल लिया गया है, जिसे जांच के लिए लैब भेजा गया। खाद्य एवं औषधि मंडल के सहायक आयुक्त रमाशंकर का कहना है कि नारकोटिक्स के सेल एंड परचेज का रिकॉर्ड मांगा गया है। यदि उसमें अनियमितता मिलती है तो औषधि प्रसाधन सामग्री अधिनियम-1940 के तहत कार्रवाई की जाएगी। छापेमारी की टीम में औषधि निरीक्षक बृजेश कुमार व माधुरी सिंह थीं।

तीन घंटे बंद रही फार्मेसी, मरीज परेशान

निरीक्षण के दौरान तीन घंटे तक केजीएमयू और क्वीनमेरी की अमृत फार्मेसी बंद रही। इससे मरीजों को काफी दिक्कत हुई। तीन घंटे तक वे दवा के लिए इधर-उधर भटकते रहे। कइयों ने बाहर से दवा खरीदी तो कुछ बगैर दवा के लौटे।

 

Posted By: Divyansh Rastogi

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