लखनऊ, जेएनएन। राजाजीपुरम में तहखाने से अवैध कॉल सेंटर चलाने वालों का नेटवर्क काफी तगड़ा था। पुलिस ने बुधवार को हिरासत में लिए गए सभी 12 आरोपितों की गुरुवार को गिरफ्तारी दर्शा दी। दैनिक जागरण में गुरुवार के अंक में खबर छपने के बाद पुलिस हरकत में आई। आननफानन पत्रकार वार्ता बुलाकर तहखाने से सभी लैपटाप व इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद दिखाकर राजफाश दर्शाया। आरोपित 'क्रांतिकारी' नाम से कथित शक्तिवर्धक दवा बेचने के लिए इंटरनेट कॉलिंग के जरिए लोगों को झांसे में लेते थे।

एडीसीपी पश्चिम विकास चंद्र त्रिपाठी के मुताबिक गिरोह का सरगना साईं सुंदर सरोज राव मुंबई में है। वह पश्चिम खरोड़ी महाराष्ट्र का रहने वाला है। साईं सुंदर के निर्देशन में ही सभी आरोपित कॉल सेंटर चलाते थे। सभी आरोपितों को प्रति माह वेतन मिलता था। जो आरोपित अधिक ग्राहकों को झांसे में लेता था, उसे अतिरिक्त रकम भी दी जाती थी।

सुआग्रा के नाम से बेचते थे वियाग्रा

आरोपित लोगों को फोन कर कथित शक्तिवर्धक दवा से फायदा होने की बात कहते थे। आरोपितों ने बताया कि वह वियाग्रा, सियालिस और लिवेट्रा नाम की दवाएं ऑनलाइन बेचते थे। छानबीन में सामने आया है कि झांसे में लिए गए लोगों को आरोपित सुआग्रा के नाम से वियाग्रा भेज देते थे।

लगातार संपर्क में रहते थे आरोपित

झांसे में लिए गए लोगों को अपने जाल में फंसाए रखने लिए आरोपित उनसे लगातार संपर्क में रहते थे। फोन कर दवा से होने वाले फायदे के बारे में पूछते थे। इसके बाद उनसे क्रांतिकारी दवा लेने की बात कहते थे। मोटी रकम वसूलने का सिलसिला जारी रखते थे। लोगों को जोड़े रखने के लिए कॉल सेंटर में कई लड़कियों भी कार्यरत थीं। हालांकि पुलिस की लापरवाही के कारण बुधवार को कई युवतियां फरार हो गई थीं।

होटल में डॉक्टर भेजने का देते थे झांसा

सूत्रों के मुताबिक आरोपित लोगों का इलाज करने के लिए डॉक्टर मुहैया कराने की बात भी करते थे। वह होटल बुक कराने और विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाकर जांच कराने का भरोसा देते थे। इसके एवज में वह होटल खर्च, डॉक्टर फीस समेत अन्य मदों के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी। रुपये जमा कराने के बाद वह संबंधित व्यक्ति से संपर्क बंद कर देते थे। गोमतीनगर थाने में एक शख्स ने ऐसे ही मामले में ठगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।

बिना सत्यापन दे दिया मकान

मकान मालिक ललित श्रीवास्तव ने बिना सत्यापन कराए ही किराए पर मकान दे दिया था। पूछताछ में सामने आया कि मकान मालिक के पास आरोपितों की कोई आइडी भी नहीं थी। इंस्पेक्टर तालकटोरा धनंजय सिंह के मुताबिक गिरोह के पीछे कौन लोग शामिल हैं, इसका पता लगाया जा रहा है। फरार युवकों के बारे में पता कर उन पर भी कार्रवाई होगी।

ये सामान हुए बरामद

पुलिस ने तहखाने से 18 लैपटाप, 30 हेड फोन, 20 माउस, चार कीबोर्ड, 20 लैपटाप चार्जर, एक हार्ड डिस्क, दो राउटर, चार स्विच, दो केबल व अन्य इलेक्ट्रानिक डिवाइस बरामद किया गया है।

महाराष्ट्र से लेकर पूर्वोत्तर तक के आरोपित

पुलिस ने महाराष्ट्र निवासी निवासी मेहराम, फरहान शेख, शहबाज खान, आसिफ शेख, परवेज, सैय्यद वाकर अब्बास, महमूद शेख, यामीन, बेंगलुरु निवासी उमर व मेघालय शिलांग निवासी इकरामुल हुसैन, नीरज थापा और सोमिन्थ को गिरफ्तार किया है।

दवा कारोबार के तार खंगालेगी ड्रग टीम

ऑनलाइन शक्तिवर्धक दवा बेचने का भंडाफोड़ होने पर ड्रग टीम भी सक्रिय हो गई है। वह पुलिस के संपर्क में है। ब्योरा जुटाकर मामले में ड्रग एक्ट की कार्रवाई भी करेगी। ड्रग इंस्पेक्टर बृजेश कुमार के मुताबिक अभी दवा का कोई स्टोरेज नहीं मिला है। पुलिस से ब्योरा मांगा है। मामले की जांच कर ड्रग एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Anurag Gupta

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