लखनऊ[सौरभ शुक्ला]। विदेश में बैठे साइबर जालसाज लोगों को फेसबुक पर इनाम का झासा देकर उनके बैंक खातों से लाखों की रकम उड़ा रहे हैं। इन जालसाजों का नेटवर्क दुनिया भर में फैला है। यह बहुत ही शातिर हैं। पहले आपको फेसबुक फ्रेंड बनाते हैं। इसके बाद आपके शहर में बड़ा व्यवसाय करने एवं जन्मदिन पर लाखों रुपये के गिफ्ट भेजने समेत कई प्रकार के प्रलोभन देकर आपसे रुपये ऐंठते हैं। इनके गिरोह में दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, बेंगलुरु और अन्य शहरों की महिलाएं समेत मैनेजमेंट छात्र भी शामिल हैं। हजरतगंज कोतवाली स्थित साइबर क्राइम सेल में आए दिन शिकायतें आ रही हैं। केस-1

जीपीओ के डिप्टी सीपीएम त्रिभुवन सिंह ने बताया कि दो अप्रैल को उनकी फेसबुक आइडी पर विदेशी महिला मिस एलिजाबेथ की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। एक्सेप्ट करने पर उसने बातचीत शुरू की। उसने लखनऊ में कपड़े का व्यवसाय करने की इच्छा जताई और करोड़ों रुपये लगने के लिए कहा। इसके लिए उसने हफ्ते भर बाद लखनऊ आने की बात कही। इसके बाद 7 अप्रैल को मुंबई से फोन आया। एक महिला ने फोन कर कहा कि वह मुंबई एयरपोर्ट से कस्टम ऑफीसर बोल रही है। तुम्हारी दोस्त एलिजाबेथ को पकड़ा गया है। उनके पास मनी क्लीयरेंस कराने के लिए रुपयों के बजाय पाउंड हैं, जिनकी कीमत 80 लाख से ऊपर है। आप इनकी मदद कर दें तो इन्हें लखनऊ भेजा जा सकता है। इसके बाद एलिजाबेथ ने बात करके सहायता मागी। इस पर त्रिभुवन सिंह ने एलिजाबेथ के द्वारा दिए गए बैंक खाते में 2.60 लाख रुपये ट्रासफर कर दिए, जिसके बाद एलिजाबेथ का मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ।

केस-2

जियामऊ निवासी विक्रम सिंह यादव ने बताया कि 10 अप्रैल को उनके वाट्सएप नंबर पर एक मैसेज आया। इसमें हैप्पी न्यू इयर 2018 का बधाई संदेश था और उसके साथ ही केबीसी जैकपॉट में उनका मोबाइल नंबर चुने जाने की बात थी। इसमें 5 लाख रुपये का इनाम भी था। इसके बाद उसने फोन किया और बताया कि इनाम की रकम आपके खाते में ट्रासफर की जाएगी। इसके लिए जालसाज ने सिक्योरिटी और कई अन्य प्रकार का झासा देकर 2.63 लाख रुपये अपने खाते में ट्रासफर करा लिए। इसके बाद विक्त्रम को ठगे जाने का पता चला। उन्होंने गौतमपल्ली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।

इन बातों का रखें ध्यान

- किसी भी अनजान व्यक्ति की फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें।

- अकाउंट संबंधी जानकारी किसी को न दें और न ही कहीं शेयर करें।

- फेसबुक पर लगी फोटो और आइडी देखकर भरोसा न करें, यह फेक हो सकती है।

- अनजान व्यक्ति द्वारा दिए गए इनाम के प्रलोभन के चक्कर में न पड़ें, वह अगर पर्सनल डिटेल की बात करे तो उसके साथ कुछ भी साझा न करें।

- लुभावने मैसेज और फोन काल्स से सावधान रहें।

ऐसे करें बचाव

- एटीएम बूथ में किसी के सामने रुपये न निकालें। ट्राजेक्शन के समय चेक कर लें कि एटीएम में कोई दूसरा कैमरा तो नहीं लगा है।

- किसी को भी बैंक और एटीएम संबंधी जानकारी फोन पर न दें। बैंक कभी भी फोन पर आपसे कोई जानकारी नहीं मागता।

- एटीएम कार्ड की जानकारी किसी को न दें। उसके पीछे लगे सीवीवी कोड को याद कर अलग नोट कर लें और उसे मिटा दें।

- दुकान या माइक्रो एटीएम से भुगतान करते समय यह ध्यान रखें कि कोई आपके कार्ड का नंबर तो नहीं देख रहा है।

- कभी भी मल्टीमीडिया मोबाइल से कार्ड की फोटो न लें। क्योंकि फोटो लेते ही उसकी डिटेल इंटरनेट एकाउंट से अपलोड हो सकती है।

- ऑनलाइन साइट पर कार्ड से भुगतान कर रहे हैं तो साइट का यूआरएल जरूर देख लें। अगर यूआरएल में हरे रंग से सिक्योर एचटीटीपीएस लिख कर न आए तो आप कार्ड की जानकारी न दें।

- बैंक कभी भी एटीएम कार्ड और खाते संबंधी कोई जानकारी फोन पर किसी उपभोक्ता से नहीं लेता।

अबतक तीन नाइजीरियन जालसाज पकड़े जा चुके हैं

इन विदेशियों के गिरोह में लखनऊ, दिल्ली, बेंगलुरु, अहमदाबाद के कुछ छात्र भी इनके गिरोह में शामिल हैं। इसके अलावा पढ़ाई के लिए विदेशों से यहा आने वाले लड़कों का भी एक बड़ा नेटवर्क है। इनका कहना है कि साइबर क्राइम सेल के एक्सपर्ट फिरोज अहमद का। उन्होंने बताया कि उनकी टीम तीन नाइजीरियन युवकों को पकड़ चुकी है। जो फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर लोगों के खाते से रुपये उड़ाते थे। वर्ष 2015 में बाराबंकी की एक युवती से फेसबुक पर दोस्ती गाठकर ठगी करने वाले नाइजीरियन को पकड़ा गया था। उसने खुद को ब्रिटेन निवासी हेमेन फेड बताकर युवती के साथ दोस्ती की थी। वह विजिटर्स वीजा पर भारत आया था।

अक्सर मिलने वाले लोग भी आपको लगा रहे हैं चूना

आपसे रोजाना मिलने वाले लोग ही आपके एटीएम, क्रेंडिट और डेबिट कार्ड की जानकारी हासिल कर आपके बैंक खाते से रुपये उड़ा रहे हैं। साइबर अपराधियों का एक गिरोह आपके शहर में स्थित पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट, होटल, शापिंग मॉल में भी सक्रिय है। आप जब भुगतान करने के लिए अपना कार्ड इन्हें देते हैं तो स्वाइप के दौरान यह लोग आपके कार्ड से जानकारी जुटा कर देश और विदेशों में बैठे अपने आकाओं को सारा ब्योरा भेज देते हैं।

इसके बाद इनके आका (हैकर) आपके खाते से रुपये उड़ा देते हैं। हैकर ऐसे तैयार कर रहे एटीएम का क्लोन

डॉ. राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय के साइबर लॉ एक्सपर्ट प्रोफेसर अमनदीप सिंह के मुताबिक राजधानी ही नहीं, देश एवं विदेशों तक हैकरों का गिरोह सक्रिय है। यह एटीएम, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड का क्लोन बनाने के लिए पहले जानकारी जुटाते हैं। इसके लिए वह जिन स्थानों पर कार्ड स्वैप होता है उस स्थान पर एटीएम, बिलिंग काउंटर पर कैमरा या लेजर मशीन लगा देते हैं। यह मशीन बटन के बराबर होती है। इन स्थानों पर कार्ड लगते ही मशीन उसकी सारी डिटेल अपने पास सुरक्षित कर लेती है। पिन कोड जानने के लिए भी एटीएम बूथ पर भी कैमरे लगाते हैं। सारी जानकारी इकट्ठा होने के बाद कार्ड का क्लोन तैयार करते हैं। हैकरों के गिरोह में शॉपिंग माल, पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट, एटीएम बूथ में काम कर रहे कर्मचारी तक शामिल होते हैं।

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