लखनऊ (जेएनएन)। जानकर हैरत होगी कि स्पोर्टस कॉलेज में ऐसे 93 बच्चों के दाखिले किए गए जिन्होंने चयन ट्रायल में भाग ही नहीं लिया। कुछ बैठे तो प्रारंभिक चयन में बाहर हो लेकिन दाखिले की सूची में नाम दर्ज हो गया। फर्जीवाड़ा करने वाले अफसरों को प्रमोशन मिला और शासन में बैठे खेल को चलाने वाले बड़े अफसर जांच रिपोर्ट को गोल-गोल घुमा रहे हैं।

अपनी बायोपिक के लिए धौनी ने लिए इतने पैसे जान हैरान रह जाएंगे आप

स्पोर्टस कॉलेज में वर्ष 2013-14 में कॉलेज की चयन परीक्षा के दौरान जमकर फर्जीवाड़ा किया गया। जिन बच्चों ने ट्रायल में भाग ही नहीं लिया उनको प्रवेश दिए गए। क्रिकेट में सर्वाधिक 72, एथलेटिक्स में 12, हॉकी में दो, फुटबाल में 5, बैडमिंटन में एक दाखिल किया गया। इसी तरह वर्ष 2014-15 में चयन परीक्षा में पास हुए बिना हुए ही 110 खिलाडिय़ों को दाखिल दिया गया। यानी जो बच्चे ट्रायल में जिलास्तर और मंडल स्तर पर फेल हुए उनको दाखिल कर लिया गया। इसमें भी क्रिकेट की डिमांड सबसे अधिक रही।

ओलंपिक में हुए सिंधू के फाइनल मैच ने रचा एक नया इतिहास

क्रिकेट के करीब 66 बच्चों को दाखिला दिया गया जो ट्रायल में फेल हुए। हैरत की बात है कि उच्चाधिकारियों के वरदहस्त के चलते कार्रवाई तो दूर आरोपों में घिरे उप निदेशक खेल अनिल कुमार बनौधा को संयुक्त निदेशक और तत्कालीन शिक्षक विजय कुमार गुप्ता को स्पोर्टस कॉलेज का प्रधानाचार्य बना दिया गया।

खेल मंत्री ने कहा, तय होगी जवाबदेही

खेल मंत्री राम सकल गुर्जर ने जागरण से कहा है कि स्पोर्टस कॉलेज में फर्जी दाखिलों की जांच रिपोर्ट में देरी क्यों हो रही इस पर जवाबदेही तय होगी। इस बारे में प्रमुख सचिव अनीता भटनागर जैन से बात की जाएगी। खेल मंत्री ने भी माना कि मामले में देरी हुई है। अगर अफसरों ने दाखिलों में फर्जीवाड़ा किया है तो सख्त कार्रवाई होगी।

Posted By: Ashish Mishra

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप