लखनऊ (जेएनएन)। भारतीय वायुसेना के किसी एक्सप्रेस-वे पर होने वाले अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशनल अभ्यास में वायुसेना के चार स्टेशनों के 17 विमान एक साथ हिस्सा लेंगे। इस दौरान इन विमानों के बीच दूरी और समय का बेहतर तालमेल होगा। वह बारी-बारी से आगरा एक्सप्रेस-वे पर उतरेंगे। इसकी झलक पिछले दिनों वायुसेना की फुल ड्रेस रिहर्सल में दिखाई दी। रक्षा मंत्रालय जनसंपर्क अधिकारी गार्गी मलिक सिन्हा  ने बताया कि ऑपरेशनल अभ्यास से पहले वायुसेना के सी-130 मालवाहक विमान से गरुड़ कमांडो को लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे पर उतारा जाएगा। उनकी मौजूदगी में वायुसेना अपना पूरा अभ्यास करेगी। अभ्यास के बाद कमांडो को सी-130 विमान से वापस भेजा जाएगा।

 वायुसेना ने अपने ऑपरेशनल अभ्यास को शनिवार को अंतिम रूप दे दिया। इस दौरान पूर्व प्रस्तावित अभ्यास में दो परिवर्तन किए गए। पहला, अब 20 की जगह 17 विमान इसमें हिस्सा लेंगे। वहीं दूसरे बदलाव के तहत अब मालवाहक विमान एएन-32 की जगह हरक्यूलिस ग्लोबमास्टर सी-130 को शामिल किया गया है। वायुसेना अधिकारियों के मुताबिक यह टैक्टिकल एयरक्राफ्ट है, जो गरुड़ कमांडों के साथ आगरा एक्सप्रेस-वे पर जांच के लिए साजो-सामान लेकर आएगा। वायुसेना के दो मालवाहक विमान सी-130 हिंडन वायुसेना स्टेशन से उड़ान भरेंगे। इसी समय गोरखपुर से तीन लड़ाकू विमान जगुआर आगरा एक्सप्रेस-वे की तरफ रवाना होंगे। ग्वालियर वायुसेना स्टेशन से छह मिराज, तो बरेली वायुसेना स्टेशन से छह लड़ाकू विमान आसमान में गर्जना करेंगे। हिंडन से पहले उडऩे वाला सी-130 आगरा पहुंचेगा और यहां से गरुड़ कमांडो और उपकरणों को लेकर उड़ान भरेगा। 

एक्सप्रेस-वे पर पहुंचेंगे विमान 

  • सुबह 10 बजे सी-130 आगरा एक्सप्रेस-वे पर गरुड़ कमांडो और साजो-सामान लेकर उतरेगा।
  • क्लियरेंस मिलने पर तीन जगुआर आगरा एक्सप्रेस-वे पर उतरेंगे और रवाना हो जाएंगे।
  • इसके बाद तीन मिराज एक लाइन से उतरेंगे जबकि इनके उड़ान भरते ही तीन और मिराज उतरेंगे।
  • तीन सुपरसोनिक लड़ाकू विमान सुखोई-एसयू 30 और इनके बाद तीन और सुखोई की लैंडिंग होगी
  • अंत में सी-130 उतरेगा और कमांडो को लेकर रवाना हो जाएगा।

 

थल से नभ तक गरुड़ कमांडो निगरानी

आगरा एक्सप्रेस वे पर वायुसेना का सबसे बड़ा ऑपरेशनल अभ्यास दुनिया की घातक कमांडो फोर्स में शुमार वायुसेना के गरुड़ कमांडो की मुस्तैदी के बीच होगा। यह गरुड़ कमांडो न केवल थल बल्कि नभ की भी निगरानी करेंगे। अपने साथ विस्फोटक या संदिग्ध वस्तुओं को पकडऩे सहित कई आधुनिक हथियारों से लैस यह कमांडो जब क्लीयरेंस देंगे तब ही अभ्यास शुरू हो सकेगा। आतंकी हमले और आपात स्थिति में वायुसेना स्टेशनों की सुरक्षा के लिए वर्ष 2003 में गरुड़ कमांडो की विंग बनाने का निर्णय हुआ था। ये कमांडो मुश्किल हालात में न केवल जमीन पर बल्कि पानी और आसमान में भी दुश्मनों के मंसूबों को परास्त कर सकते हैं। करीब ढाई साल की कड़ी ट्रेनिंग के बाद इन कमांडो को तैयार किया जाता है। उनको उफनती नदियों और आग से गुजरने का भी कठिन प्रशिक्षण दिया जाता है। बिना सहारे पहाड़ पर चढऩे और भारी बोझ के साथ कई किलोमीटर की दौड़ और घने जंगलों में रात गुजारनी पड़ती है। इन्हें हवाई हमले, दुश्मनों की टोह लेने, स्पेशल कॉम्बैट और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए भी तैयार किया जाता है। इनके पास आधुनिक मारक हथियार भी हैं। इसमें इजराइल के बने किलर ड्रोन भी हैं जो अपने टारगेट पर बिना किसी आवाज के निशाना लगा सकते हैं। 

 

 

Posted By: Nawal Mishra

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