लखनऊ, जागरण संवाददाता। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अच्युतानन्द मिश्र ने कहा कि राजनीति समाज को बांटती है, जबकि संस्कृति समाज को सहेजती है। संस्कृति से ही समाज सुधरेगा। रविवार को गन्ना शोध संस्थान के सभागार में अमृत महोत्सव समिति द्वारा 'स्वतंत्रता का अमृत तत्व' विषय पर संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि जिस संविधान के आधार पर हमारे देश की शिक्षा नीति, प्रशासन व न्याय व्यवस्था चल रही है, उसका पुनरावलोकन होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान वास्तव में हमारा नहीं है। हिंदी राजभाषा के रूप में स्वीकार की गई, लेकिन आज भी न्यायालयों की भाषा अंग्रेजी बनी हुई है।

महात्मा गांधी हिंद स्वराज में लिखते हैं-हम अंग्रेजियत को स्वीकार नहीं करेंगे। अंग्रेजों ने भारत में जो संस्कृति फैलाई, उसने हमारे देश की एकता, अखंडता व बहुलता को नष्ट किया। 1857 के संघर्ष को अंग्रेजों ने सिपाहियों का विद्रोह करार दिया। वीर सावरकर ने पहली बार स्वाधीनता संग्राम नाम दिया। अच्युतानन्द मिश्र ने कहा कि अब लोकतंत्र से लोक गायब हो गया। मुख्य अतिथि आर्यावर्त बैंक के अध्यक्ष एसबी सिंह ने कहा कि आज भी बहुत सारे कानून 1947 के पहले के बने हैं, उनमें संशोधन होना चाहिए। अगर हमारा संविधान हमारे देश के शासन व अनुशासन के अनुकूल नहीं है तो सुधार किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अवध प्रांत के सह प्रांत बौद्धिक प्रमुख मनोज कांत ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन स्व से प्रेरित था।

भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में स्वराज, स्वधर्म, स्वदेशी व स्वभाषा की बात थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के कालखंड में विज्ञान के क्षेत्र में भी हमारे देश के वैज्ञानिक शोध कार्य कर रहे थे। ब्रिटिश सरकार भारत के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध व अनुसंधान के कार्यों को रोकने का प्रयास कर रहे थे। अंग्रेजों द्वारा भारत के वैज्ञानिकों को प्रताड़ित किया जा रहा था। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डा. अश्वनी दत्त पाठक ने की। कार्यक्रम का संचालन कमलेश सिंह ने किया। इस मौके पर लखनऊ दक्षिण भाग के भाग संघचालक सुभाष अग्रवाल, सह विभाग कार्यवाह बृजेश पाण्डेय, सह भाग कार्यवाह अतुल सिंह, बाल आयोग के सदस्य श्याम त्रिपाठी, डा. शुचिता, सुशील जैन, दयाशंकर पांडेय आदि मौजूद रहे।

Edited By: Vikas Mishra