लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और यूपी अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग आयोग के निर्वतमान अध्यक्ष बृजलाल ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों के बलिदान होने की घटना को लेकर सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के एक ट्वीट पर पलटवार किया है। अखिलेश यादव ने एक कार्टून को रीट्वीट किया था, जिसमें पुलिस अपराधियों से कह रही है कि हमने तुम्हें घेर लिया है तो अपराधी कह रहे हैं-'सेम टू यू'।

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने कहा है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए पुलिसकर्मियों की शहादत की कोई कीमत नहीं है। बृजलाल ने जवाबी ट्वीट किया कि 'अपने पिता से सियासी मुठभेड़ करने वाले अखिलेश यादव, तुम क्या जानो, कैसे होती है जमीन पर मुठभेड़।' 

इसके बाद बयान जारी कर पूर्व डीजीपी बृजलाल कहा कि लखनऊ, वाराणसी, फैजाबाद विस्फोट के आरोपित खालिद मुजाहिद की 18 मई 2013 को फैजाबाद से लाते समय लू लगने से मौत हो गई थी तो तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर उनके समेत 42 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध बाराबंकी कोतवाली में हत्या की एफआइआर दर्ज कराई गई थी। ऐसा करके यूपी पुलिस, एसटीएफ़ व एटीएस के अधिकारियों को संदेश दिया गया था कि आतंकियों की ओर नजर उठाकर न देखा जाए। सपा शासनकाल में आतंकियों के मुकदमे भी वापस लेने का प्रयास किया गया।

बृजलाल ने कहा कि अखिलेश यादव क्या जानें मुठभेड़ क्या होती है? जिंदगी-मौत में चंद सेकंड का अंतर होता है, मुठभेड़ों में। मैंने खुद मुठभेड़ों में नेतृत्व किया है और 19 शातिर अपराधियों को जहन्नुम पहुंचाया है। मेरे सेवाकाल में मेरे निर्देशन में 300 से अधिक दुर्दांत अपराधी और आतंकवादी मारे गए हैं। मैं जानता हूं कि मुठभेड़ में जीवन को दांव पर लगाना पड़ता है। शहादत देने वाले के परिवारों की व्यथा की जरा भी कद्र होती तो अखिलेश यादव ऐसा ट्वीट करके पुलिसकर्मियों की शहादत का अपमान नहीं करते। प्रदेश के 22 करोड़ लोग और तीन लाख पुलिसकर्मी इस अपमान को कभी नहीं भूलेंगे।

पूर्व डीजीपी बृजलाल ने कहा कि 8 जुलाई, 2011 को मैनाठेर (मुरादाबाद) में धर्म विशेष के सैकड़ों गुंडों ने डीआईजी एके सिंह को गोली मारी और उन्हें मरा समझकर छोड़ा। डीआईजी तीन-चार साल इलाज के बाद भी पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं हो पाए हैं। अखिलेश यादव ने सत्ता में आते ही तुष्टीकरण के तहत न्यायालय से मुकदमा वापस लिया लेकिन यहां भी कोर्ट आड़े आ गई और अब मुकदमा चल रहा है। डीआईजी के एस्कोर्ट कर्मी उन्हें छोड़कर भाग गए थे। उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। हमला करने वाले गुंडों की सिफारिश पर अखिलेश यादव ने उन कायर पुलिसकर्मियों को सेवा में बहाल करके मनचाही पोस्टिंग भी दी।

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