बाराबंकी, जेएनएन। पूर्व एमएलसी गयासुद्दीन किदवई का लंबी बीमारी के बाद रविवार को निधन हो गया। वे विगत तीन माह से बीमार चल रहे थे। उनकी अचानक रविवार को तबीयत बिगड़ी, उन्हें लखनऊ के निजी अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। 

ऐसा रहा राजनीतिक करियर 

वे दो बार विधान परिषद सदस्य रहे। वर्ष 1990 में सबसे पहले समाजवादी पार्टी से जीते थे। दोबारा वर्ष 1997 में विधि विशेषज्ञ के आधार पर राज्यपाल की ओर से उन्हें विधान परिषद सदस्य बनाया गया। वे 82 वर्ष के थे। गयासुद्दीन किदवई जिला बार एसोसिएशन में निर्विरोध अध्यक्ष भी रहे। सपा में महत्वपूर्ण पद के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता रहे। इनके दो पुत्र फराज किदवई व फारूख किदवई हैं। पैतृक गांव बड़ेल में दोपहर दो बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा।

निधन पर शोक

अधिवक्ताओं ने शोक जताया है। पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिलीप गुप्ता ने इसे बड़ी क्षति बताया। निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में लवकुश वर्मा, पंकज श्रीवास्तव, रवि शुक्ला आदि प्रमुख रहे।

डूब गया सियासत का ध्रुव तारा

पूर्व एमएलसी के निधन पर समाजवादी चिंतक राजनाथ शर्मा कहा कि सांझी विरासत के प्रतीक गयासुद्दीन किदवई हमारे बीच नहीं। सियासत का ध्रुव तारा डूब गया है। मेरे लिए यह ह्रदय विदारक सूचना है। क्योंकि अक्सर उनसे मेरी मुलाकात हो जाया करती थी। उनका जाना सांझी विरासत व कौमी एकता का जाना है।

 

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