लखनऊ, जेएनएन। कानून व्यवस्था और एनकाउंटर मामलों को लेकर यूपी पुलिस जहां विपक्ष के निशाने पर है, वहीं पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने भी सवाल खड़े किए हैं। लाइसेंसी शस्त्रधारकों पर कारतूसों का ब्योरा न देने पर की गई कार्रवाई को उन्होंने गैर कानूनी बताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखी है। उन्होंने पुलिस को कानून पालन और छवि अच्छी रखने की सलाह भी दी है।

पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि कुछ दिन पहले मैंने अखबार में पढ़ा था कि कुछ शस्त्र लाइसेंसियों के खिलाफ पुलिस ने इसलिए मुकदमा दर्ज कर दिया था कि वे खरीदे और खर्च किए गए कारतूसों का हिसाब नहीं दे सके। इसके साथ ही उनके शस्त्र जमा कर लिए गए और लाइसेंस निरस्त करने की रिपोर्ट देने की बात भी कही गई।

सुलखान सिंह के मुताबिक, लाइसेंस की शर्तों में ऐसी कोई शर्त नहीं है कि लाइसेंसी अपने कारतूसों का कोई रिकॉर्ड रखेगा। जो शर्त अधिनियम या नियमावली में नहीं है, वह किसी प्राधिकारी द्वारा नहीं लगाई जा सकती है। इस आधार पर शस्त्र भी पुलिस अपने कब्जे में नहीं ले सकती। इस आधार पर लाइसेंस भी निरस्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने लिखा है कि नागरिकों को तो अपने अधिकारों के प्रति सतर्क रहना ही चाहिए, पुलिस को भी गैर कानूनी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखनी है, लेकिन कानून के अंतर्गत, कानून का अतिक्रमण करके नहीं।

वहीं, लखनऊ पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का तर्क है कि 20 मार्च 2019 को डीजीपी मुख्यालय से एक आदेश जारी हुआ था। उसमें इस बात का जिक्र है कि हर्ष फायरिंग की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अंकुश लगाने का आदेश दिया है। ऐसे में कोई शस्त्र लाइसेंस धारक प्राप्त कारतूसों और खोखों का विवरण देने की स्थिति में नहीं है तो निश्चित तौर पर यह महत्वपूर्ण जांच का विषय होगा। इस मामले पर पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह का कहना है कि पूर्व डीजीपी ने जो विषय उठाया है, हम उसका परीक्षण कराएंगे। 

Posted By: Umesh Tiwari

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