लखनऊ  [ दुर्गा शर्मा ] । 

एहसास-ए-इश्क, मौसम-ए-बहारा लखनऊ।

सितारों के बीच चांद है हमारा लखनऊ।।

कुछ लम्हे यादों में ठहर जाते हैं। ये जवां-जवां, हंसी-हंसी लखनऊ की सरजमीं भी कुछ ऐसी ही है। जिसने भी कुछ पल यहां बिताए, अपने साथ थोड़ा-थोड़ा ‘लखनऊ’ जरूर ले गया। ‘कलर्स ऑफ इंडिया’ प्रोग्राम के तहत नार्थ डकोटा स्टेट यूनिवर्सिटी, फागरे, यूएसए से 22 छात्रएं लखनऊ आई थीं। कुछ दिन शहर में गुजारने के बाद शनिवार को छात्रओं ने विदा ली।

उससे पहले शनिवार को नवयुग कन्या महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विदेशी छात्रओं ने मनोभाव बयां किए। सृजन फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विदेशी छात्रओं ने नवयुग कॉलेज की छात्रओं संग संवाद किया। इसमें शहर के लिए प्यार संग कुछ शिकायतें भी थीं। इसके बाद चेहरों पर लखनवी रंगत लिए छात्रएं अगले पड़ाव आगरा की ओर बढ़ गईं। शहर छोड़ते वक्त मानो वह कह रही थीं..

ऐ लखनऊ!

ये कैसी शान और अदा है तेरी

जो एक बार आते हैं, तेरे मुरीद हो जाते हैं।।

इमामबाड़े से गोमती किनारे तक

दो जनवरी को लखनऊ आईं विदेशी छात्रओं ने छोटा-बड़ा इमामबाड़ा, रूमी दरवाजा, अमीनाबाद बाजार संग गोमती किनारे का भी नजारा किया। एक दिन इन्होंने शीरोज हैंगआउट में एसिड अटैक पीड़िताओं के साथ भी गुजारा। विदेशी छात्रओं ने कहा, शहर की इमारतें, स्वाद लाजवाब और लोगों की नर्ममिजाजी लाजवाब है।

बदहाल यातायात से शर्मिदगी

विदेशी छात्रएं जहां शहर की अच्छी तस्वीर अपने साथ ले गईं, वहीं इस तस्वीर को कुछ चीजों ने बदरंग भी किया। विदेशी छात्रओं ने कहा, शहर में अव्यवस्थित यातायात, बीच सड़क खुलेआम घूमते पशु और अत्यधिक हॉर्न बजने से हम परेशान हुए।

प्राचार्य नवयुग कन्या महाविद्यालय की डॉ. सृष्टि श्रीवास्तव ने कहा कि जब हम विदेशी मेहमानों से मिलते हैं, तो ऐसे संवाद छात्रओं के व्यक्तित्व विकास में सहायक होते हैं। कॉलेज की छात्रएं की सक्रिय भागीदारी ने इसे कामयाब बनाया।

सवाल-जवाब में संस्कृति

विदेशी और नवयुग कॉलेज की छात्रओं के बीच संवाद में भारतीय संस्कृति पर भी बात हुई। कुछ सवाल-जवाब :

  • भारत आने के लिए भारतीय संस्कृति के अलावा किस चीज ने सबसे ज्यादा आकर्षित किया? - रूपा
  • भारतीय संस्कृति के अलावा यहां का आर्किटेक्चर आकर्षित करता है। लखनऊ में ऐतिहासिक इमारतों को देखकर शहर के गौरवशाली इतिहास का अंदाजा हुआ। - ऐले, विदेशी छात्र
  • क्या हमें पाश्चात्य संस्कृति के अनुसरण की जरूरत है? - सुलेखा
  • अफ्रीकी छात्र ने कहा, किसी भी कीमत पर अपनी संस्कृति को मत छोड़िए।
  • स्पैनिश छात्र ने प्रश्न किया, वो कौन सी चीज है जिसे हम भारत से सीख सकते हैं?
  • छात्रओं ने पारिवारिक मूल्यों को अहम बताया, जिसे भारत से सीखा जा सकता है। वहीं इतिहास विभाग की अध्यापिका डॉ. शोभा मिश्र ने कहा कि भारत से पूरा का पूरा दर्शन सीख सकते हैं। उन्होंने ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ के साथ अपनी बात पूरी की।
  • पाश्चात्य और भारतीय संस्कृति में लड़कियों की स्वतंत्रता में क्या अंतर है? - इति बाजपेयी
  • भारतीय लड़कियों में हिचकिचाहट ज्यादा है।

Posted By: Anurag Gupta

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