लखनऊ, जेएनएन। आग लगने के बाद शोरगुल सुनकर तीर्थराज की बेटी वंदना की नींद खुली थी। वंदना के कमरे में हर तरफ धुंआ भरा था। वह ठीक से सांस तक नहीं ले पा रही थी। कमरे का दरवाजा खोला सामने आग की लपटें नजर आईं। वंदना वापस भागकर अपने बेड तक पहुंची और प्रतापगढ़ में मौजूद अपने पिता को फोन किया। बोलीं, पापा घर में आग लग गई है, मैं फंस गई हूं। तीर्थराज ने बेटी को साहस बनाए रखने की बात कही और परिवार के अन्य सदस्यों को जगाकर मकान से बाहर निकलने को बोला।

 

बेटा, बेटी, बहू, पोती और भांजे को खोने के बाद तीर्थराज और उनकी प8ी मीना गमगीन थे। रिश्तेदार और परिवारीजन में कोहराम मचा था। लोहिया अस्पताल से वापस लौटे तीर्थराज ने अपने उजड़ चुके आशियाने की ओर देखा तो वहां मौजूद लोगों की आंखे नम हो गईं। तीर्थराज ने बताया कि बेटी ने कुछ देर बाद उन्हें दोबारा फोन किया था। उसने बताया था कि हर तरफ आग है और उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। इसपर उन्होंने छत के रास्ते पड़ोसी के घर में कूदने को कहा। वंदना ने सीढ़ियों के रास्ते छत पर जाना चाहा, लेकिन आग की लपटों में घिर चुका दरवाजा वह पार न कर सकी। धीरे-धीरे वंदना की आवाज धुएं के गुबार में दब गई और फिर वह दोबारा फोन न कर सकी। तीर्थराज ने बेटी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रहे।

वंदना के एक पैर में थी चप्पल: पिता की सलाह पर वंदना ने शोर मचाकर अपने भाई को जगाने की कोशिश की थी। वह अपने कमरे से भागते हुए बालकनी की तरफ पहुंची, लेकिन वहां आग की लपटों ने दरवाजे को घेर रखा था। दमकल कर्मियों ने जब वंदना को बाहर निकाला था तो उसके एक पैर में चप्पल मिली थी। पड़ताल में दूसरी चप्पल बालकनी में पड़ी मिली, जो जल चुकी थी।

पांच बहनों का इकलौता भाई था सुमित: तीर्थराज की चार बेटियां पूनम, रचना, अनुष्का, तान्या और वंदना थी। सुमित इकलौता बेटा था। चार बड़ी बहनों का सुमित लाडला था। चारों बहनों की शादी हो चुकी है। इकलौते बेटे की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। बुधवार को विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि घटना स्थल पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को ढांढ़स बढ़ाया।

तबाह हुआ परिवार, मातम में बदली खुशियां: सुमित के पिता तीर्थराज ने बताया उनकी पौत्री शक्ति का १६ मई को मुंडन होना था। बेटी वंदना की शादी भी पक्की हो गई थी। दो-तीन दिन में शादी की तिथि तय होनी थी। परिवारीजन मुंडन और बेटी की शादी की तैयारी में लगे थे। खरीदारी की जा रही थी। हादसे में एक साथ पांच लोगों की मौत से पूरा परिवार तबाह हो गया और खुशियां मातम में बदल गईं।

छह माह से रह रहा था पुनीत: मूलरूप से फैजाबाद के धौरहरा रामनगर निवासी पुनीत एक होम्योपैथ कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव का काम करता था। वह छह माह से सुमित के घर पर रह रहा था। सुमित के परिवार में मां माया, भाई अमित और बहन अर्चना हैं। शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद पुनीत के घरवाले उसे लेकर फैजाबाद रवाना हो गए।

बैकुंठ धाम में हुआ अंतिम संस्कार, पिता ने दी मुखाग्नि: पोस्टमार्टम के बाद सुमित उनकी पत्नी जूली और बहन वंदना के शव को लेकर परिवारीजन बैकुंठ धाम पहुंचे। जहां, तीर्थराज सिंह ने दोपहर में तीनों को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। मासूम शक्ति के शव को दफनाया गया। वहीं, पुनीत का शव उसके बड़े भाई अमित फैजाबाद लेकर चले गए।

आग से घिरी बेटी ने पिता को दो बार फोन करके बताए हालात

जान बचाने को भागी थी छत की ओर, दरवाजे में लग चुकी थी आग

सात घंटे धधकता रहा घर और गोदाम

अग्निकांड के दौरान मंगलवार रात करीब एक बजे से बुधवार सुबह आठ बजे तक घर और गोदाम धधकता रहा। भूतल पर स्थित करीब हजार स्क्वायर फीट सहित प्रथम तल के एक कमरे में गत्ते में पैक गैस चूल्हे, रबर और अन्य सामान फर्श से लेकर छत तक खचाखच भरा था। स्थिति पर काबू पाने के लिए पीछे की दीवार को जेसीबी से तोड़ा गया। इस कारण दमकल कर्मियों को आग बुझाने में भी काफी दिक्कतें हुई। गोदाम में डंप गत्ते, पाइप और अन्य सामान ज्वलनशील था। आग के संपर्क में जैसे ही यह सामान आया तो चारों तरफ दमघोंटू धुआं आसपड़ोस में फैल गया। धुएं के कारण आसपड़ोस के लोग भी अपने घरों से निकलकर बाहर आ गए। दमकल कर्मी भी अधिक देर तक नहीं रुक पा रहे थे। कुछ दमकल कर्मियों को बीए सेट पहनाया गया। जिसके बाद उन्होंने फायर फाइटिंग शुरू की तो स्थिति कुछ सामान्य होने लगी।

 

Posted By: Anurag Gupta

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