लखनऊ (जेएनएन)। दिल्ली के चांदनी चौक से निकला राजीव हरिओम भाटिया बालीवुड का चमकीला सितारा अक्षय कुमार बना तो इसके पीछे किस्मत ही नहीं दिन-रात की मेहनत, अनुशासन और कभी हार नहीं मानने वाला जज्बा रहा।

कोलकाता से बैंकाक और फिर मायानगरी मुंबई तक के अपने सफर को अक्षय ने खुद बयां किया तो वाकई उनमें एक रियल हीरो की इमेज दिखायी पड़ी जो जिंदगी में हर कदम पर चुनौतियों से फाइट कर आगे बढ़ा। लखनऊ के होटल ताज में इंटरप्रन्योर आर्गनाइजेशन द्वारा आयोजित एक प्रोग्राम में राजीव हरिओम भटिया ने अक्षय कुमार बनने तक के कई अनछुए पहलुओं को भी टटोला। मात्र 14 साल की उम्र में ही अक्षय ने कोलकाता में ट्रैवेल एजेंट के यहां स्पॉट ब्वाय की नौकरी की। दो साल काम किया इस दौरान जिंदगी में कई ऐसे लम्हों को देखा जो वाकई हैरान करने वाले रहे।

कोलकाता से फिर वह ढाका चले गये। ढाका में एक होटल में काम करने के बाद बैंकाक गये जहां पांच साल तक होटल में खाना बनाया और मार्शल आट्र्स सीखी। जिदंगी की जरूरतों को पूरा करने के लिए अक्षयके पास पैसे नहीं होते थे इसलिये कई बार फाइट भी की।

बैंकाक से कोलकाता और फिर दिल्ली आकर अक्षय ने चांदनी चौक में ज्वैलरी बेचने का काम किया। किस्मत ने मुंबई बुलाया और यहां पर बच्चों को मार्शल आट्र्स सिखाने लगा। इसी दौरान किसी ने मॉडलिंग का ऑफर दिया और पहले ही दिन 21 हजार रुपये मिल गए। दिन-रात मेहनत कर बमुश्किल पांच-छह हजार कमाने वाले अक्षय को अचानक इतना पैसा मिला तो फिर मॉडलिंग की ओर रुख किया। बस यहीं से शुरू हो गया सफर जो अब तक चल रहा है।

नौ हजार बच्चों को सिखा चुके मार्शल आट्र्स

अक्षय कुमार की जिंदगी अनुशासन और तपस्या की मिसाल है। सुबह चार बजे से ही अक्षय की दिनचर्या शुरू हो जाती है। खुद को फिट रखने के लिए शाम साढ़े छह बजे के बाद कुछ नहीं खाते और यही वह दूसरों से भी कहते हैं। मार्शल आट्र्स को जिंदगी में आत्मसात करने वाले अक्षय अब तक करीब नौ हजार लड़कियों को मार्शल आट्र्स की टे्रनिंग दे चुके हैं। अक्षय कई ट्रेनिंग स्कूल चला रहे हैं जहां बच्चों को निशुल्क टे्रनिंग दी जाती है।

Posted By: Nawal Mishra

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