लखनऊ, जेएनएन। शहर के चिकित्सा संस्थानों में रैगिंग का खौफ कायम है। केजीएमयू के बाद अब लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में भी घटनाएं बढ़ रही हैं। यहां के सीनियर छात्रों ने भी जूनियर को प्रताडि़त करना शुरू कर दिया। कक्षा से लेकर हॉस्टल तक खौफ  कायम है।

केजीएमयू में एक अगस्त से एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू हो गईं, जबकि लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में 16 अगस्त से शैक्षिक सत्र शुरू हुआ। दोनों कैंपस में रैगिंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहने का दावा किया गया। लोहिया संस्थान में जहां आधा दर्जन से अधिक सदस्य एंटी रैगिंग में तैनात है तो केजीएमयू में 80 से अधिक लोगों की टीम बनाई गई। मगर, सीनियर की हरकतों पर शिकंजा नहीं कस पा रहा है। जूनियर छात्रों का जीना मुहाल है। केजीएमयू में भी फोन पर छात्रों की रैगिंग की जा चुकी है। अफसरों ने पूछताछ कर मामले को रफा-दफा कर दिया।

पहले नोटिस देकर पल्ला झाड़ा 

लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में जूनियर छात्रों ने एक सितंबर को पहली बार रैगिंग घटना उजागर हुई थी। यूजीसी से शिकायत होने पर दो सीनियर छात्रों को तलब किया गया। इसमें एक 2017 व दूसरा 2018 बैच का छात्र है। सभी के अभिभावकों को फोन पर जानकारी दे दी गई। वहीं, नोटिस देकर कार्रवाई से पल्ला झाड़ लिया गया। ऐसे में सीनियर छात्रों के हौसला बुलंद हो गए। उन्होंने अब छोटे बाल, नीचे देखकर चलने की नसीहत दे डाली

केजीएमयू में रैगिंग की उजागर हुई घटनाएं 

  • 19 व 20 अगस्त 2017 को रैगिंग करने पर वर्ष 2016 के दो छात्र अनुराग अग्रवाल व अभिजीत गुप्ता का हॉस्टल आवंटन निरस्त किया गया। 
  • 24 अगस्त 2017 को सीवी हॉस्टल के छात्र कैंपस में रैगिंग के लिए जुटे करीब 20 सीनियरों पर एक-एक हजार का अर्थदंड लगाया गया। 
  • 13 फरवरी 2018 को जूनियर डॉक्टरों ने सीनियर पर रैगिंग का आरोप लगाया।
  • नवंबर 2018 को सीनियर छात्रों ने वाट्सएप कॉल पर जूनियर की रैगिंग की। आधा सीनियर दर्जन छात्रों को हॉस्टल से निकाला गया।
  • दिसंबर 2018 में दंत संकाय में रैगिंग का मामला उजागर
  • 12-13 मई 2019 रात को 2015-16 के एमबीबीएस छात्रों ने वर्ष 2017 बैच के छात्रों को पार्किंग में मुर्गा बनाया। 13 निलंबित।

Posted By: Divyansh Rastogi

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