बाराबंकी, जेएनएन। शिक्षा विभाग में फर्जी कागजात के सहारे नौकरी दिलाने का रैकेट चल रहा है। इसका पर्दाफाश एसटीएफ द्वारा पकड़े गए शिक्षक पिता-पुत्र के बाद किया है। बाराबंकी, गोरखपुर, बलरामपुर और महाराजगंज में फर्जी नियुक्तियां की गई हैं। एसटीएफ के पास अब वह सबूत है, जिसके जरिए फर्जी शिक्षक और नौकरी दिलाने वाले बड़े अफसरों का हाथ है। जिले के ही 12 शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी डिग्री फर्जी लगी है और वह सहायक अध्यापक हैं। 

गोरखपुर जिले की नगर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम गोपालापुर के मूल निवासी गिरजेश कुमार ने वर्ष 1997 में बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के पद पर बलरामपुर जिले से जयकृष्ण दुबे नाम के दस्तावेजों से नौकरी शुरू की। वर्ष 2016 में महाराजगंज जिले से स्थानांतरित होकर बाराबंकी आया। मौजूदा समय हैदरगढ़ ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय गेरावां में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती है। इसने अपने पुत्र आदित्य त्रिपाठी को वर्ष 2009 में रविशंकर त्रिपाठी नाम से फर्जी डिग्रियों के सहारे सहायक अध्यापक पद पर प्राथमिक स्कूल हैदरगढ़ में नौकरी दिलाई। एसटीएफ द्वारा पकड़े जाने के बाद फर्जी तरीके से नौकरी दिलाने का रैकेट की बात पता चली। यह दोनों पिता-पुत्र महाराजगंज और बलरामपुर, बाराबंकी में फर्जी नियुक्तियां की है। इसमें बड़े अफसरों का हाथ था, जिनके इशारे पर पिता-पुत्र युवाओं से पैसा लेकर नियुक्ति कराते थे।

12 शिक्षक हुए चिन्हित

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वीपी सिहं ने बताया कि जिले में 12 शिक्षक चिन्हित हुए हैं, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी कर रहे हैं। यहां तक कि नंबरों में धांधली कर नौकरी हथियाई गई है। इसमें सुरेंद्र नाथ सहायक अध्यापक गुलामाबाद और नवनीता यादव सहायक अध्यापक मसौली को भी फर्जी तरीके से नौकरी कर रहे थे। इसके अलावा सहायक अध्यापक भावना को जब नोटिस दी गई तो वह कोर्ट में चली गई, जहां अब मामला चल रहा है। दो याचकाएं और दाखिल हो चुके हैं। यह ऐसे लोग थे जो फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी कर रहे थे। कुछ शिक्षक फरार हो गए हैं। 

Posted By: Divyansh Rastogi

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