लखनऊ, जेएनएन। बारिश से मौसम में आर्द्रता बढ़ गई है। अक्टूबर से गुलाबी ठंड का अहसास होगा। ऐसे में हृदय रोगियों में ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट बढ़ जाएगा। लिहाजा, हार्ट के आफ्टर लोड में भी इजाफा होगा। ऐसे में समय रहते डॉक्टर को दिखाएं। दवाओं की डोज बदलवाएं। वहीं, सामान्य व्यक्ति भी रोजाना व्यायाम करें। शोध में पाया गया है कि रोजाना व्यायाम करने से हृदय को रक्त आपूर्ति करने वाली धमनियों में छोटी-छोटी नसें बन जाती हैं। इन्हें कोलेट्रल कहते हैं।

इनमें भी मुख्य धमनी के साथ-साथ रक्त की आपूर्ति होती रही है। कभी मुख्य धमनी के ब्लॉक होने पर यह छोटी नसें हार्ट को रक्त आपूर्ति कर देती हैं। ऐसे में ये नसें अटैक का खतरा टालने में मददगार बन जाती हैं। इस तरह व्यायाम करने वाले व्यक्ति में हार्ट अटैक का खतरा अन्य से 25 फीसद कम हो जाता है। 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस से पूर्व दैनिक जागरण में आयोजित 'हेलो डॉक्टरÓ कार्यक्रम में केजीएमयू के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव चौधरी ने पाठकों को दिल के रोगों से बचाव के उपाय बताए।

सवाल: मोटापे से क्या दिल की बीमारी हो जाती है? [अंकुर, ऊंचाहार] 

जवाब:मोटापे से डायबिटीज और ब्लड प्रेशर हो जाता है। ऐसे में तीन से चार गुना अधिक हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसमें पेट के आस-पास का फैट सबसे अधिक घातक होता है। 

सवाल: पत्नी की एंजियोप्लास्टी हुई थी। दवाएं क्या हमेशा खानी पड़ेंगी? (बजरंगीलाल, ऐशबाग)

जवाब: खून पतला करने, लिपिड कम करने की दवाएं चलती रहेंगी। इनसे दोबारा हृदय रोग का खतरा टलेगा। ऐसे में दवा बंद न करें।

सवाल: कभी-कभी घबराहट होती है। सीने से गले तक भारीपन लगता है। (कल्पनाथ मिश्रा, बलरामपुर)

जवाब: चलने-फिरने में यदि सीने में भारीपन लगता है, तो यह एंजाइना के लक्षण हैं। एक बार डॉक्टर को दिखा लें।

सवाल: भागमभाग भरी जीवनशैली में दिल को कैसे सुरक्षित रखें? (प्रदीप, काकोरी)

जवाब: रोजाना 10 से 12 हजार कदम चलें। फास्टफूड, मीठा व तैलीय खाद्य पदार्थ न खाएं। पौष्टिक आहार का सेवन करें।

सवाल: एंजियोप्लास्टी हुई है। अब क्या सावधानी बरतें, ताकि बीमारी न बढ़े? (नागेंद्र, रायबरेली)

जवाब:  दवा एक दिन भी ब्रेक न करें। भारी वजन अचानक नहीं उठाना है और न ही तेज दौडऩा है। समय-समय पर चिकित्सक को दिखाते रहें।

सवाल: पर्याप्त नींद नहीं लेना भी क्या हार्ट अटैक का कारण है? (राजेश, आलमबाग)

जवाब: नींद लेने से बॉडी व मसल्स को आराम मिल जाता है। ऐसे में हृदय की भी बीट कम हो जाती है और उसे राहत मिल जाती है। यह हृदय को फिट रखने में सहायक होती है। 

सवाल:  कभी-कभी चेस्ट पेन होने लगता है। क्या करें? (कौशलेंद्र, हरदोई)

जवाब:  कभी-कभी चेस्ट पेन हो रहा है। चलने-फिरने में दिक्कत नहीं हो रही है तो एंजाइना नहीं है। कन्फर्म करने के लिए ट्रेड मिल टेस्ट करा लें।

सवाल: सांस की दिक्कत कुछ दिन से बढ़ गई है। इनहेलर असर नहीं कर रहा है। (राजकुमार, इंदिरानगर)

जवाब: मौसम में आद्र्रता है। अस्थमा व सीओपीडी रोगियों की समस्या बढ़ जाती है। इंफेक्शन का खतरा भी अधिक रहता है। एक बार डॉक्टर से मिलें। दवाओं के डोज में फेरबदल हो सकता है।

सवाल: पापा को पेसमेकर लगा है। अभी गिर गए थे। ऐसे में क्या डिसलोकेट होने का खतरा है।

प्रमोद कुमार, निरालानगर

जवाब: वह लेफ्ट साइड करवट न लें। कंधे के ऊपर हाथ न घुमाएं। यदि बेहोश होकर गिर गए हैं तो एक बार चेकअप करा लें।

सवाल:  भाई के वॉल्व में सिकुडऩ है। ऑपरेशन से ठीक होगा या व्यायाम से।

गौरव, अयोध्या

जवाब: पहले ईको किया जाएगा। यदि समस्या होगी तो बैलूनिंग की जाएगी। आयुष्मान के लाभार्थी हैं तो फ्री इलाज हो जाएगा। समस्या हो गई है तो व्यायाम से ठीक नहीं होगी।

सवाल: पिता हार्ट के मरीज हैं। उनके गले में भी खराबी आ रही है।

फूलचंद, लखनऊ 

जवाब: हार्ट की कुछ दवाओं से गले में दिक्कत होने लगती है। मगर, उन्हें बंद न करें। मौसम भी बदला है। घबराएं नहीं समस्या ठीक हो जाएगी।

सवाल: पत्नी की सांस फूलती है। लेटते वक्त चेस्ट पेन होने लगता है। 

ऋषि, बलरामपुर 

जवाब: चेस्ट एक्स-रे कराएं। दिक्कत न पकड़ में आए तो ईसीजी और ईको कराएं। हार्ट वॉल्व में सिकुडऩ की समस्या हो सकती है।

सवाल: मम्मी को बीपी की समस्या है। खाने के बाद सीने में जलन होने लगती है।

धुन्नी, लखनऊ 

जवाब: चलने-फिरने में सीने में दर्द नहीं होता है। ऐसे में आहार नली व पेट रोग की समस्या है। गैस्ट्रो के डॉक्टर को दिखाएं।

सवाल: बदलते मौसम में रक्तचाप को कैसे नियंत्रित रखूं?

दिवाकर शुक्ला, हरदोई

जवाब: आप यदि उच्च रक्तचाप के मरीज हैं, तो नियमित व्यायाम करें। नमक का सेवन कम करें। समय-समय पर बीपी अवश्य चेक कराएं। उसी हिसाब से दवाओं का डोज निर्धारित करें। 

सवाल: ठंड में सर्दी-जुकाम बहुत होता है, इससे बचाव के उपाय बताएं।

धर्मेंद्र, सीतापुर

जवाब: मौसम के बदलाव को नजरअंदाज न करें। खासकर सुबह-शाम घर से निकलते वक्त ठंडी हवा से बचाव करें। एसी और ठंडे पेय पदार्थों से दूरी बनाएं।

सवाल: ठंड के मौसम में कौन सी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है?

परमानंद, हरदोई

जवाब: ठंड के मौसम में उच्च रक्तचाप, हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, नाक से खून आना व ब्रेनहेमरेज जैसी दिक्कतें बढ़ जाती है। इसलिए बीमारी के लक्षणों को नजरंदाज न करें।

सवाल: उच्च रक्तचाप की समस्या है। खान-पान में क्या सावधानी बरतें?

शिवेंद्र सिंह, अयोध्या

जवाब: नमक कम खाएं। फास्ट फूड और तैलीय खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें। तनाव कम लें। किसी न किसी एक्टिविटी में खुद को व्यस्त रखें।

सवाल: अक्सर जुकाम हो जाता है। सिर भारी लगता है। 

रंजीत, गोंडा

जवाब: बार-बार जुकाम हो रहा है तो साइनस में टेंडेंसी हो सकती है। ईएनटी चिकित्सक से संपर्क करें। तब तक राहत के लिए भाप लें। आराम मिलेगा।

सवाल:  उच्च रक्तचाप का मरीज हूं। व्रत में दवाएं कैसे लूं?

आनंद, लखनऊ

जवाब: व्रत में भी ब्लड प्रेशर से जुड़ी दवाएं कतई न छोड़ें। इस बीमारी की दवा का खान-पान से कोई लेना देना नहीं। पानी के साथ भी दवा ले सकते हैं।

सवाल: ब्लड प्रेशर की समस्या के साथ कोलस्ट्रॉल भी बढ़ा हुआ है। क्या करूं?   

भावना, हरदोई

जवाब: मीठा कम खाएं। तैलीय खाद्य पदार्थों से परहेज करें। डाइट पर कंट्रोल रखें। इससे कम से कम दवाओं का सेवन करना पड़ेगा। नियमित व्यायाम को भी दिनचर्या में शामिल करें।

सवाल: सर्दी में जुकाम से कैसे बचें?

दिनेश, सीतापुर

जवाब: ऐसे मौसम में ठंड से बचाव करें। सुबह-शाम निकलते वक्त कपड़ों का पहनावा सही रखें, ताकि ठंडी हवा की चपेट में न आएं। जुकाम में बेवजह दवाओं के बजाय भाप लें। 

सवाल: आधा किलोमीटर चला तो लड़खड़ा गया। चेस्ट पेन भी होने लगा।

प्रेम नारायण, रायबरेली

जवाब: अचानक शरीर असंतुलित होना हार्ट व न्यूरो दोनों की दिक्कत हो सकती है। यदि चेस्ट पेन है तो एक बार ईसीजी करा लें। रिपोर्ट सामान्य आने पर किसी न्यूरो के चिकित्सक से संपर्क करें।

चुपके से दस्तक देती उच्च रक्तचाप की समस्या 

डॉ. गौरव के मुताबिक उच्च रक्तचाप की समस्या चुपके से शरीर में दस्तक देती है। देश में 50 फीसद लोग बीमारियों की चपेट में होने के बावजूद इससे अनभिज्ञ हैं। 40 वर्ष का व्यक्ति ही नहीं, 20 वर्ष का युवा भी अब रक्तचाप (हाईपरटेंशन) की चपेट में है। वहीं, लखनऊ शहर की बात करें तो लगभग 35 फीसद लोग इसकी गिरफ्त में हैं। इसका जिक्र हाल में किए गए एक सर्वे में किया गया है। 

30 की उम्र में भी हार्ट अटैक

डॉ. गौरव के मुताबिक 30 की उम्र में भी हार्ट अटैक के मामले आ रहे हैं। इसका प्रमुख कारण तनाव, धूमपान व शराब का सेवन करना या फिर फैमिली हिस्ट्री है। ऐसे में जिन लोगों के घर में उच्च रक्तचाप व हृदय रोग की बीमारी वाले हों, वह अपने बच्चों की 25 से 30 की आयु के बीच ब्लड की जांच, शुगर, ईसीजी व कोलेस्ट्रॉल की जांच अवश्यकरा लें, ताकि बीमारी की समय से पहचान की जा सके।

बीमारियों का कारण

  • अनियमित दिनचर्या
  • भागदौड़ व तनाव भरी जीवनशैली
  • फास्टफूड व तैलीय खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन करना
  • पर्याप्त नींद न लेना
  • मोटापा

धूमपान व शराब का सेवन करना

  • बीमारी से बचाव
  • नियमित व्यायाम करें
  • सुबह-शाम टहलने की आदत डालें
  • ठंड बढऩे पर दिल के रोगी सुबह टहलने के समय में बदलाव कर लें
  • उच्च रक्तचाप के मरीज सर्दी में अधिक हार्ड एक्टिविटी से बचें
  • ठंडा पानी और कोल्ड ड्रिंक न पिएं
  • गुनगुना पानी व गर्म पेय पदार्थ का सेवन करें
  • ठंड बढऩे पर कपड़े तीन-चार लेयर में पहनें
  • वजन पर नियंत्रण रखें
  • नकारात्मक सोचने और तनाव से बचें
  • पौष्टिक व संतुलित आहार लें 
  • नियमित समयांतराल में रक्तचाप की जांच कराएं
  • ब्लड प्रेशर, शुगर के रोगी दवा बंद न करें 
  • समय-समय पर चिकित्सक से परामर्श लें

बीमारी के लक्षण

सीने में दर्द, शरीर में भारीपन, पसीना आना, घबराहट व कमजोरी महसूस हृदय रोग के लक्षण हैं। 

 

Posted By: Anurag Gupta

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