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एएमयू के पूर्व कुलपति प्रो. तारिक मंसूर भाजपा का मुस्लिम चेहरा, मुसलमानों में पसमांदा बिरादरी से आते हैं मंसूर

Published: Mon, 17 Aug 2026 07:21 PM (IST)

Prof Tariq Mansoor: प्रो. तारिक मंसूर शिक्षाविद और चिकित्सक रहे हैं। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य हैं ।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ प्रोफेसर तारिक मंसूर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ प्रोफेसर तारिक मंसूर

HighLights

  1. उत्तर प्रदेश से विधान परिषद सदस्य अब भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

  2. एएमयू के शताब्दी वर्ष समारोह में पीएम मोदी को बुलाने वाले पूर्व वीसी

  3. भाजपा और आरएसएस के काफी करीबी हैं प्रोफसर मंसूर

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी की पीडीए की काट खोज ली है। भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मुस्लिम और ओबीसी चेहरों को जगह देने के साथ भाजपा ने मिशन उत्तर प्रदेश 2027 की तैयारी भी शुरु कर दी है।

भाजपा ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए कई चेहरों को मौका दिया गया है। प्रोफेसर तारिक मंसूर को संगठन में दोबारा शामिल किय गया है। तारिक को एक बार फिर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। प्रो. तारिक मंसूर शिक्षाविद और चिकित्सक रहे हैं। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य हैं और बीजेपी से जुड़े मुस्लिम चेहरे के तौर पर पार्टी में सक्रिय हैं। अब उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष नियुक्त उत्तर प्रदेश के विधान परिषद के सदस्य प्रोफेसर तारिक मंसूर की चर्चा सर्वाधिक हो रही है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुलपति से भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का सफर तय करने वाले प्रोफेसर मंसूर मुस्लिम में कुरैशी बिरादरी से आते हैं और कुरैशी को मुस्लिम समुदाय में पसमांदा कहा जाता है।

प्रोफेसर मंसूर विधान परिषद सदस्य बनने से पहले छह वर्ष (सात मई 2017 से दो अप्रैल 2023) तक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुलपति थे। प्रो. तारिक मंसूर के पहले से ही भाजपा और आरएसएस के नेताओं के साथ करीबी संबंध थे। उन्होंने एएमयू के शताब्दी वर्ष समारोह में पीएम नरेन्द्र मोदी को बुलाया था तो काफी हंगामा भी हुआ था। प्रो. मंसूर के बेटे के निकाह में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शिरकत की थी।

देश में वर्ष 2019 में जब सीएए और एनआरसी को लेकर बवाल हो रहा था तो उस दौरान अलीगढ़  यूनिवर्सिटी में भी छात्रों ने  CAA और NRC के खिलाफ आंदोलन किया। तब प्रो मंसूर ने वाइस चांसलर के रूप में कैंपस के अंदर पुलिस फोर्स बुला ली थी और यह पहली बार हुआ जब एएमयू कैंपस के अंदर पुलिस आई।

पसमांदा बिरादरी से आते हैं मंसूर

प्रो. तारिक मंसूर मुस्लिमों में कुरैशी बिरादरी से आते हैं और कुरैशी को मुस्लिम समुदाय में पसमांदा कहा जाता है। भाजपा इस पसमांदा समुदाय तक अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कई कार्यक्रम भी कर रही है। पीएम मोदी ने कुछ समय पहले भोपाल में कहा था कि अगर हम मुसलमान भाई-बहनों की तरफ देखते हैं, वोट बैंक की राजनीति करने वालों ने पसमांदा मुसलमानों को जीना मुश्किल करके रखा हुआ है। उनको तबाह करके रखा है।

दरअसल, मुसलमानों में पसमांदा मुस्लिम सामाजिक और आर्थिक के साथ ही राजनीतिक और शैक्षणिक रूप से भी काफी पिछड़े हैं। देश में मुसलमानों की कुल आबादी में करीब 85 फीसदी पसमांदा हैं जबकि 15 फीसदी उच्च जाति के मुसलमानों की आबादी है। दलित और बैकवर्ड मुस्लिम पसमांदा वर्ग में आते हैं।

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