लखनऊ, [दुर्गा शर्मा]। परिवार एक मजबूत ढाल है। कोरोना काल में परिवार की अहमियत का और ज्यादा अहसास हुआ। शहर में कई ऐसे परिवार हैं, जहां दो से ज्यादा लोग एक साथ कोरोना संक्रमित हुए। एहतियात के साथ परिवार के लोगों ने एक दूसरे का ख्याल रखा और संक्रमण की चपेट से बचा लाए।

परिवार की एकजुटता हर दुःख-सुख बांट लेती है

निराला नगर निवासी पांडेय परिवार के लिए 18 अप्रैल का दिन कोरोना त्रास्दी से उपजा जीवन भर का दुख लेकर आया। परिवार के मुखिया यूपी पावर काॅरपोरेशन से सेवानिवृत्त रामेश्वर पांडेय की पत्नी वरिष्ठ लोक गायिका आरती पांडेय का कोरोना से निधन हो गया। परिवार में तीन बेटे आशीष, मनीष, अविनाश, तीन बहुएं मंजरी, मयूरी, शोभा और छह पोते पतियां हैं। आरती पांडेय के निधन के बाद परिवार के सभी सदस्यों की कोविड जांच की गई, जिसमें रामेश्वर पांडेय, मयूरी पांडेय और शोभा पांडेय कोरोना पाॅजिटिव निकले। घर पर ही आइसोलेट रहे। छोटे बेटे अविनाश कहते हैं, मां के चले जाने ने हमें तोड़ दिया था, पर पिता को संभालना भी जरूरी था। परिवार की एकजुटता हर दुःख सुख बांट लेती हैं, हमने भी यही किया। हम एक दूसरे के लिए दिन-रात जागे, बिना कहे भी एक दूसरे की जरूरतों को समझा, इसी को तो परिवार कहते हैं।

बने रहे एक दूसरे का संबल

मानसरोवर योजना सेक्टर ओ, शहीद पथ निवासी बिजनेसमैन गोविंद लाल शर्मा और उनकी अधिवक्ता पत्नी कंचन भट्ट के घर पर तीन पीढ़ियां रहती हैं। परिवार में गोविंद लाल की मां संतोखा देवी और बेटा आयुष्मान शर्मा भी हैं। कोरोना ने दस्तक दी तो कंचन भट्ट की मां शकुंतला देवी भी इन्हीं के साथ रहने लगीं। कोरोना के बढ़ते मामलों के साथ ही इनके परिवार के सदस्य भी संक्रमण की चपेट में आ गए। पहले कंचन को बुखार और खांसी हुई, फिर पति गोविंद लाल शर्मा और सास संतोखा देवी की तबीयत बिगड़ी। इस दौरान परिवार के सभी सदस्य होम आइसोलेशन में एक दूसरे का संबल बने रहे। कंचन कहती हैं, परिवार के साथ ने हर मुश्किल आसान की। कोविड नियमों का पालन करते हुए सबने एक दूसरे का ख्याल रखा। आज सभी सदस्य स्वस्थ हैं।