लखनऊ, जेएनएन। लाखों दीपकों से जगमगाए मनकामेश्वर उपवन घाट और नमोस्तुते मां गोमती से गुंजायमान वातावरण के बीच आदि गंगा गोमती की आरती हुई तो पूरा मनकामेश्वर उपवन घाट भक्ति से सराबोर हो उठा। चार हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने देव दीपावली के इस उत्सव में दीपक जलाकर गोमती को स्वच्छ और निर्मल बनाने का संकल्प भी लिया। मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्यागिरि के सानिध्य में एक दिन पहले से ही उपवन में तीन लाख दीपकों में घी भरने का काम शुरू हो गया था।

 

जल शक्ति मंत्री डॉ.महेंद्र सिंह और महापौर संयुक्ता भाटिया की मौजूदगी में दीपोत्सव हुआ। दीप प्रज्जवलित होते ही पूरे परिसर में फैली दीपकों की रोशनी देव दीपावली के उत्सव में चार चांद लगा रही थी। बुजुर्ग और महिलाओं के साथ ही युवा व युवतियों ने भी देव दीपावली के इस पर्व में भागीदारी की। कोई सेल्फी ले रहा था तो कोई दीपकों को जलाने के साथ खुद को कैमरे में कैद कर रहा था। बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया। 

मंदिर की महंत देव्या गिरि ने बताया कि दीपोत्सव रिकॉर्ड तो बनना नहीं था, इसलिए जलते दीपक की गिनती नहीं की गई। चार लाख दीपक परिसर में दोपहर तक बिछा दिए गए थे। इसके बाद इंजीनियङ्क्षरग कॉलेज, एनसीसी के कैडेट और अभिभावकों ने अपने दीपक जलाए जो दो लाख के करीब थे। उन्हें पहले मंदिर प्रशासन की ओर से दीपक दिए गए थे।

कुडिय़ा घाट जले 5395 दीपक

कार्तिक पूर्णिमा के दिन कुडिय़ा घाट पर आदि गंगा गोमती की महाआरती की गई। तहरी भोज के साथ ही श्री शुभ संस्कार समिति की ओर से 5395 दीपक जलाए जाएंगे। समिति के महामंत्री ऋद्धि किशोर गौड़ ने बताया कि भजनों के बीच समिति के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत पांडेय के संयोजन में होने वाले 14वें दीपोत्सव में अभिषेक खरे आशीष अग्रवाल व समाजसेवी और व्यापारी शामिल हुए। झूलेलाल घाट पर भजनों के बीच सनातन महासभा की ओर से आदि गंगा गोमती की आरती की गई। खदरा के शिव मंदिर घाट पर धनंजय द्विवेदी के संयोजन में आरती हुई तो हनुमान सेतु मंदिर के पास 1100 और पिपराघाट पर 5100 दीपक जलाए गए। चौक के कोतवालेश्वर मंदिर में भंडारे के साथ जल शक्ति मंत्री डॉ.महेंद्र सिंह ने आरती की।

ऐतिहासिक कतकी मेला

झूलेलाल घाट पर ऐतिहासिक कतकी मेले की शुरुआत भी मंगलवार से हुई। झूलों को लगाने के साथ ही सफाई का खास ध्‍यान रखा गया। नगर निगम की ओर से मेले को लेकर तैयारियाेें पर विशेष ध्‍यान दिया गया। सवा महीने तक प्रदेश के जिलों के मशहूर और सस्ते सामान मेले में मिलेंगे।

प्रकाशोत्सव पर सजा दरबार

फूलों से सजे गुरुग्रंथ साहिब, मत्था टेकतीं संगतें, फूलों की बारिश के बीच शबद कीर्तन पेश करते रागी और लंगर छकते लोग। कुछ ऐसा ही माहौल मंगलवार को राजधानी के गुरुद्वारों में नजर आया। लखनऊ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से डीएवी कॉलेज मैदान में हुए मुख्य आयोजन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। 

गुरु नानक देव के 550वें प्रकाशोत्सव के तहत गुरुद्वारा नाका हिंडोला से फूलों की बारिश के बीच गुरुग्रंथ साहिब को सुबह डीएवी कॉलेज मैदान के सजे दीवान में स्थापित किया गया। रागी भाई राजिंदर सिंह के आसादीवार के बाद अमृतसर से आए रागी भाइयों ने शबद सुनाकर संगतों को निहाल किया। ज्ञानी सुखदेव सिंह ने गुरु की जीवनी पर प्रकाश डाला तो रागी भाई हरदीप सिंह, ज्ञानी दविंदर पाल सिंह, गुरुवचन सिंह, सुरजीत सिंह व ज्ञानी जसवंत सिंह परवाना ने कहु नानक हम नीच करमा, शरण परे की राखहु सरमा... और नानक नाम मिले जो जीवां नानक नाम मिले... जैसे कई शबद सुनाकर सभी को निहाल किया। 

उडिय़ा समाज का बोइटो वंदना

विकास के इस चकाचौंध में भी हमारी धार्मिक मान्यताओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उडिय़ा समाज के बोइटो वंदना के पर्व पर मंगलवार को कुछ ऐसा ही नजारा झूलेलाल घाट पर नजर आया। केले के तने से बनी आस्था की नाव से व्यापार बढऩे के सपने देखने की उत्सुकता समाज के लोगों में नजर आई। 

हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन लखनऊ उडिय़ा समाज की ओर से यह आयोजन होता है। पारंपरिक बोइटो वंदना के पर्व की शुरुआत सुबह अंकित व साथियों के भजन से हुई। भक्ति के माहौल के बीच समाज के आने का क्रम शुरू हुआ और देखते ही देखते लोगों का जमावड़ा लग गया। उडिय़ा समाज के अध्यक्ष जीबी पटनायक के नेतृत्व में झूलेलाल घाट पर जुटे समाज के लोगों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। समाज के सचिव डॉ.डीआर साहू ने बताया कि केले के तने से बनीं 220 नावों को गोमती के पानी में प्रवाहित किया गया। सुबह पूजन के साथ ही  पारंपरिक खिचड़ी का भोग बांटा गया। इस अवसर पर एडीजी एसएन साबत मौजूद रहे।

इसलिए मनाया जाता है पर्व

प्रोफेसर डॉ.सुनीता मिश्रा ने बताया कि बारिश में नाव से व्यापार बंद हो जाता है। दीपावली के बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन पानी में व्यापार करने वाले नाव से उतरते हैं। उनके सफल व्यापार और जानमाल की सुरक्षा की कामना की जाती है। इसी मान्यता के चलते केले के तने से बनी नाव प्रवाहित की जाती है। उड़ीसा में यह पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।  

 

Posted By: Anurag Gupta

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