लखनऊ, जागरण संवाददाता। ऊर्जा मंत्री से लेकर पावर कारपोरेशन के चेयरमैन द्वारा कई बार निर्देश देने के बाद भी तारों के मकड़जाल को कम करने का प्रयास नहीं किया गया। हुसैनगंज खंड के अंतर्गत आने वाले फूलबाग में बिजली विभाग बेबस नजर आता है। यहां महकमे के खंभों पर ही सारे जहां को बोझ देखा जा सकता है। अगर यहां कोई फाल्ट आता है तो बिजली कर्मियों को अपना फाल्ट खोजने में अतिरिक्त समय देना पड़ता है, क्योंकि फाल्ट ठीक करते वक्त ध्यान रखना पड़ता है, किसी के घर का इंटरनेट या केबल कही प्रभावित न हो जाए।

यही नहीं, खंभे पर सीढ़ी लगाते ही आसपास के लोग पहले ही शक ही निगाह से देखने लगते हैं कि कही उनका केबल तार व इंटरनेट कनेक्शन बिजली कर्मियों द्वारा खराब न कर दिया जाए। फूलबाग मुहल्ला राजधानी की तस्वीर को साफ दिखाता है कि अभियंता चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। यहां बिजली के खंभों की तरफ देखने से साफ लगता है कि ऊर्जा मंत्री के आदेश फाइलों में दफन हो चुके हैं। राजधानी के 110 वार्डों में अस्सी वार्ड के अंतर्गत आने वाले बिजली घरों से पोषित क्षेत्रों का यही हाल है।

केबल व इंटरनेट संचालकों की अपनी कोई व्यवस्था नहींः केबल व इंटरनेट संचालकों के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि वह अपने खंभे लगाए या भूमिगत लाइनों से उपभोक्ताओं को कनेक्शन दें। यही नहीं ऐसी स्थितियों में लोग बिजली के खंभों के सहारे अपना लाखों रुपये का कारोबार कर रहे हैं। इसका खामियाजा बिजली उपभोक्ताओं के साथ साथ बिजली महकमे को भी उठाना पड़ रहा है। अभियंताओं के मुताबिक कुछ टेलीकाम कंपनियों है जो वीआइपी इलाकों में इंटरनेट कनेक्शन के लिए खंभों का किराया जमा करती हैं, लेकिन यह ग्राफ दस से पंद्रह फीसद के आसपास ही है।

Edited By: Vikas Mishra