लखनऊ, राज्य ब्यूरो। Electricity Theft In UP क्या बिजली कंपनियों में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते ही उनका घाटा बढ़ते-बढ़ते एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है? उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का तो यही मानना है कि भ्रष्टाचार के चलते ही प्रतिवर्ष पांच हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बिजली चोरी हो रही है जिससे कंपनियों का घाटा बढ़ता जा रहा है।

बिजली कंपनियों में चले आपरेशन क्लीन

परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने चोरी पर अंकुश लगाकर कंपनियों को घाटे से उबारने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि बिजली कंपनियों में भी बड़े पैमाने पर आपरेशन क्लीन चलाया जाए। वर्मा का कहना है कि लक्ष्य के सापेक्ष प्रदेश में विद्युत राजस्व की वसूली नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता सेवा की रेटिंग से स्पष्ट है कि बिजली कंपनियों में अभियंताओं की कार्यप्रणाली में सुधार के बिना स्थिति नहीं सुधरेगी।

पांच हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बिजली चोरी

आंकड़ों का हवाला देते हुए परिषद अध्यक्ष ने बताया कि राज्य में प्रतिवर्ष 1.20 लाख मिलियन यूनिट बिजली खरीदी की जा रही है। इसकी लागत लगभग 61 से 62 हजार करोड़ रुपये है। इसमें 20 प्रतिशत वितरण हानियों को आधार मानकर यदि बिजली चोरी का आकलन किया जाए तो सालाना लगभग पांच हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बिजली चोरी हो रही है। वर्मा के मुताबिक वर्तमान वित्तीय वर्ष में लगभग 70 हजार करोड़ रुपये के राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य है।

अस्थायी कनेक्शन और बिलिंग घोटाले पर फोकस

अक्टूबर तक केवल 32,508 करोड़ रुपये ही राजस्व प्राप्त हुआ है। ऐसे में बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं। चोरी के लिए जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पिछले दिनों पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा कड़े कदम उठाए जाने से ही अस्थायी कनेक्शन और बिलिंग घोटाले जैसे गंभीर मामले पकड़े गए हैं।

Edited By: Prabhapunj Mishra

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