लखनऊ, राज्य ब्यूरो। योगी आद‍ित्‍यनाथ सरकार-2.0 ने पहले सौ दिनों में एक ऐसा निर्णय भी लिया जिससे सीधे तौर पर बिजली महंगी नहीं हुई। केंद्र सरकार के बार-बार कहने के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विदेशी कोयला नहीं खरीदा। घरेलू कोयले से लगभग 10 गुने महंगे विदेशी कोयले के न लिए जाने से बिजली लगभग एक रुपये यूनिट और महंगी नहीं हुई।

इस बीच पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने सरकार की मंशा के मुताबिक भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की नीति अपनाते हुए आपरेशन क्लीन के तहत कई वरिष्ठ अफसरों-अभियंताओं को निलंबित और बर्खास्त भी किया जिससे आने वाले समय में बिजली कंपनियों की बिगड़ी व्यवस्था में और सुधार दिखाई दे सकता है।

सरकार के सौ दिन पर ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजली उत्पान के लिए विदेशी कोयला खरीदने की अनुमति न देकर बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। वर्मा न कहा कि अगर मुख्यमंत्री ने विदेशी कोयले पर रोक न लगाई होती तो बिजली के उत्पादन की लागत काफी बढ़ जाती जिससे उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली की दर में एक रुपये यूनिट की बढ़ोतरी होती।

खासबात तो यह रही कि देश में कोयले की कमी के बावजूद राज्य में बिजली उत्पादन की यूनिटों को नहीं बंद करना पड़ा। वर्मा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उपभोक्ताओं के बिजली कंपनियों पर निकल रहे 22045 करोड़ रुपये के एवज में सरकार मौजूदा बिजली की दरों में कमी कराकर प्रदेशवासियों को बड़ा तोहफा दे।

बता दें क‍ि विदेशी कोयले से एक रुपये यूनिट तक बिजली महंगी होने के कारण उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर आयातित कोयले पर रोक लगाने की मांग की थी। इस पर आयोग ने पावर कारपोरेशन प्रबंधन से जवाब-तलब किया था। चूंकि विदेशी कोयले से लगभग 11 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्ययभार आ रहा था इसलिए प्रबंधन ने सरकार से अनुमति मांगी थी। चूंकि सरकार ने अनुमति नहीं दी है इसलिए राज्य विद्युत उत्पादन निगम द्वारा विदेशी कोयला खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं की गई थी।

Edited By: Prabhapunj Mishra