लखनऊ, जेएनएन। महिला हिंसा व राजनीति के खिलाफ अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (एपवा) ने मंगलवार को प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित कर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व आजादी की मांग की। प्रदेशभर से आई महिला पदाधिकारियों ने हैदराबाद व उन्नाव की घटना में जान गवाने वाली महिलाओं को श्रद्धांजलि पेश की। साथ ही देश में बढ़ रही घटनाओं पर चिंता व्यक्त कर सरकार पर हल्ला बोला। इस बीच महिला ङ्क्षहसा को रोकने के लिए कई प्रस्ताव पास किए गए। 

अमीनाबाद स्थित गंगा प्रसाद मेमोरियल सभागार में एपवा का आठवां सम्मेलन आयोजित किया गया। एपवा की राष्ट्रीय सचिव कविता कृष्णन ने कहा कि देश में महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ जैसे युद्ध छिड़ा है। उप्र में स्थिति और भी बदतर है। यहां भाजपा के विधायक और पूर्व मंत्री दुष्कर्म के आरोपी हैं। पूरा सत्ता तंत्र दुष्कर्म के आरोपियों को बचाने में लगा हो, तो ऐसे में कितने लोग इंसाफ के लिए आवाज बुलंद कर पाएंगे। संगठन की राष्ट्रीय सचिव मीना तिवारी ने कहा कि भाजपा व संघ परिवार महिलाओं की आजादी और अधिकारों से डरती है, इसलिए उन्हें खत्म करने पर आमादा है। देश के संविधान को नुकसान पहुंचाकर उसकी जगह महिला और दलित विरोधी मनुस्मृति को लागू करना चाहती है। प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा कि देशभक्ति व राष्ट्रवाद के नाम पर सरकार महिलाओं की जगह दोषियों, अपराधियों व भूमाफियाओं को संरक्षण दे रही है।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को डॉ. शाहीन, नाईश हसन, ताहिरा हसन, विद्या रजवार ने संबोधित किया। संचालन कुसुम वर्मा ने किया। इस बीच दुष्कर्म-हत्या के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट में त्वरित फैसला करने, न्यूनतम पांच सौ दैनिक मजदूरी पर सालभर रोजगार देने व महिलाओं के नाम जमीन के पट्टे देने सहित कई प्रस्ताव पास किए गए। सम्मेलन में कृष्णा अधिकारी को प्रदेश अध्यक्ष व कुसुम वर्मा को सचिव चुना गया। सम्मेलन से पहले चारबाग से अमीनाबाद तक महिलाओं ने आक्रोश मार्च निकाल सरकार विरोधी नारेबाजी की। 
 

Posted By: Anurag Gupta

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