यूपी में जल जीवन मिशन गड़बड़ी मामले में ईडी ने शुरू की जांच, 6 IAS अफसर भी रडार पर
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जल जीवन मिशन के तहत खराब हुई पानी की टंकियों की मंजूरी और भुगतान का पूरा हिसाब मांगा है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
ईडी ने जल जीवन मिशन की विफल टंकियों पर विस्तृत ब्योरा मांगा।
टंकियों की मंजूरी, भुगतान और ठेकेदारों के कार्य की जांच।
विफलताओं पर संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों पर कार्रवाई का विवरण तलब।
परवेज अहमद, लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल योजना में खराब हुईं टंकियों की मंजूरी से लेकर भुगतान तक का पूरा हिसाब मांगा है। इस अवधि में जल निगम और वर्ष 2021 के बाद जल निगम (ग्रामीण) में रहे करीब आधा दर्जन आईएएस अधिकारियों के कार्यकाल के कार्य भी इसके दायरे में हैं।
प्रत्येक टंकी की स्वीकृति से भुगतान तक का ब्यौरा उपलब्ध कराने के लिए ईडी ने 20 कॉलम का प्रारूप जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक को भेजा है। हालांकि ईडी को अभी यह ब्यौरा नहीं भेजा गया है। जल निगम का ग्रामीण-नगरीय में विभाजन 2021 में हुआ था।
ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 54 के तहत यह सूचना मांगी है। इसमें वे टंकियां शामिल हैं, जो कमीशनिंग से पहले या बाद, परीक्षण या उपयोग के दौरान गिर गईं, फट गईं, उनमें दरार या रिसाव हुआ, वे झुक गईं या धंस गईं या असुरक्षित या अनुपयोगी घोषित की गईं।
मरम्मत या पुनर्निर्माण वाली टंकियों का ब्योरा भी मांगा गया है। प्रत्येक मामले में प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति, निविदा, डीपीआर और स्वीकृत संरचनात्मक डिजाइन व ड्राइंग देनी होगी। कार्यादेश पाने वाली फर्म का नाम-पता, पंजीकरण, अनुबंध मूल्य, अवधि और वास्तविक पूर्णता तिथि भी मांगी गई है।
निर्माण से पहले जारी संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणपत्र, मृदा परीक्षण और मिक्स डिजाइन रिपोर्ट भी उपलब्ध करानी होगी। गुणवत्ता जांच के लिए तृतीय पक्ष निरीक्षण (टीपीआई) एजेंसी की रिपोर्ट, गुणवत्ता ऑडिट लाग और सीमेंट, एग्रीगेट व प्रबलन इस्पात की सामग्री परीक्षण रिपोर्ट मांगी गई है।
भुगतान की जांच के लिए रनिंग अकाउंट (आरए) बिल और अंतिम बिल के साथ ठेकेदार, उपठेकेदार और टीपीआई एजेंसी के बैंक खातों का विवरण तलब किया गया है। इसमें खाताधारक का नाम, खाता संख्या, बैंक, शाखा शामिल हैं।
टंकी विफल होने पर कार्रवाई का विवरण भी मांगा
ईडी के उपनिदेशक ने पूछा है कि भुगतान जारी करने से पहले टंकी की संरचनात्मक अखंडता का सत्यापन किसने किया था? इसके लिए संबंधित अवर, सहायक व अधिशासी अभियंता के नाम व पदनाम मांगे गए हैं। जल जीवन मिशन के पोर्टल पर अपलोड की गई प्रगति और पूर्णता की फोटो भी मांगी गई हैं। इनमें वे फोटो हैं, जिनके आधार पर भुगतान जारी किया गया।
टंकी विफल होने पर कार्रवाई का विवरण भी मांगा गया है। इसमें संबंधित अभियंताओं, ठेकेदारों और टीपीआई एजेंसियों के विरुद्ध निलंबन, कारण बताओ नोटिस और काली सूची में डालने जैसी कार्रवाई शामिल है।
आदेश संख्या व तारीख, लापरवाही या भ्रष्टाचार से जुड़ी एफआईआर, जांच रिपोर्ट, अनुमानित वित्तीय नुकसान और वसूली का ब्योरा भी देना होगा। प्रारूप में प्रत्येक टंकी की अलग पंक्ति में जनपद, विकासखंड, ग्राम पंचायत, योजना व क्षमता, लागत, कार्यादेश, ठेकेदार, टीपीआई एजेंसी, निर्माण व कमीशनिंग की तारीख, विफलता की तिथि व कारण, कुल भुगतान, अंतिम भुगतान की तिथि, संबंधित अवर से लेकर अधिशासी अभियंता तक, एफआईआर, कार्रवाई, वसूली और वर्तमान स्थिति दर्ज करनी है।
