लखनऊ [जितेंद्र उपाध्याय]। दिल्ली के संग्रहालय में रखे वर्ष 1855 में बने विश्व के सबसे पुराने भाप इंजन 'फेयरी क्वीन को वर्ष 1997 में फिर से पटरी पर दौड़ाने वाले तत्कालीन रेलवे अधिकारी मनमोहन शर्मा को अब सिस्टम दौड़ा रहा है। वर्ष 2001 से महज 5850 रुपये के लिए रेलवे के अधिकारी उन्हें चक्कर लगवा रहे हैं। खास बात यह कि मनमोहन शर्मा इस रकम को वापस लेने के लिए राजधानी से उत्तर पश्चिम रेलवे बीकानेर तक आने जाने में करीब दो लाख रुपये खर्च कर चुके हैं। बावजूद इसके उन्हें रकम नहीं मिली। वह भी अपने हक की रकम हासिल करने पर अड़े हैं और अब वह उपभोक्ता फोरम में शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं।

कानपुर रोड एलडीए कॉलोनी सेक्टर-जी निवासी मनमोहन सिंह (76) बताते हैं कि उन्होंने सेवानिवृत्त होने से पहले वर्ष 2001 में रेलवे बोर्ड का आजीवन सदस्य बनने के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा की फीस के रूप में 6,500 रुपये जमा किए थे। बोर्ड ने परीक्षा में पास होने पर जमा की गई फीस का 90 फीसद वापस होने का पत्र दिया था। इसी कड़ी में एडीएमई (पावर) के पद पर बीकानेर में तैनात रहे मनमोहन शर्मा ने न केवल परीक्षा पास की। यही नहीं उन्हें रेलवे बोर्ड ने आजीवन सदस्य बनने का प्रमाण पत्र और परिचय पत्र भी जारी कर दिया, लेकिन उन्हें फीस की 90 फीसद रकम 17 साल बाद भी वापस नहीं मिली। तब से अब तक वह दो हजार बार कागजात व रसीद की फोटोस्टेट करा चुके हैं और 20 बार बीकानेर जा चुके हैं। बावजूद उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।

पहले किया इंकार, फिर किया स्वीकार 

रेलवे बोर्ड ने पहले तो फीस का पैसा देने से इंकार कर दिया, लेकिन जब मनमोहन शर्मा ने सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के तहत इसकी सूचना मांगी तो बोर्ड ने पैसा देने की बात स्वीकार की। 29 सितंबर 2011 को कार्यालय मंडल रेलवे बीकानेर से पत्र आया कि आपको 90 फीसद फीस की रकम वापस होनी है। आप फीस रसीद की मूल कॉपी भेजें, जिससे रकम की वापसी सुनिश्चित की जाए। फिर 29 सितंबर 2016 को डीआरएम बीकानेर कार्यालय से 5,850 रुपये वापसी की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी गई। पत्र आने के एक साल से ज्यादा समय होने के बावजूद अभी तक पैसा उन्हें नहीं मिला है।

खैरात नहीं अधिकार चाहिए

रेलवे के साथी अधिकारियों ने मनमोहन शर्मा को कई बार इस छोटी सी रकम को जेब से देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उनका कहना है कि रेलवे बोर्ड ने कहा था, इसलिए पैसा अधिकार से मांग रहा हूं। मुझे खैरात नहीं चाहिए।

ऐसे बनाया था विश्व रिकॉर्ड

वर्ष 1997 में बीकानेर में एडीएमई के पद पर तैनात रहे मनमोहन शर्मा ने रेलवे इंजीनियरों की टीम के साथ विश्व के सबसे पुराने भाप इंजन 'फेयरी क्वीन को न केवल पटरी पर दौड़ाया बल्कि बनाने के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया। उससे पहले वर्ष 1905 में डैमेज घोषित किए गए इस इंजन को सात बार विदेशी इंजीनियरों ने बनाने का प्रयास किया था। वर्ष 1971 में इसे चंदौसी जोनल ट्रेनिंग स्कूल में रेलवे के मॉडल के रूप में स्थापित किया गया। बाद में दिल्ली के संग्रहालय में स्थापित इस इंजन को मनमोहन शर्मा व अन्य की टीम ने संग्रहालय से निकाल कर एक बार फिर से चला दिया।

भाप से चलने वाले इस इंजन की गति भी उन्होंने बढ़ाकर 10 किमी प्रति घंटे से 90 किमी प्रति घंटा कर दी। वर्ष 1997 में दो महीने 27 दिन में तैयार किए गए इस इंजन को बनाने के लिए रेलवे ने भले ही आठ लाख रुपये का बजट दिया था, लेकिन मनमोहन शर्मा व टीम ने मात्र 97 हजार रुपये में इंजन को दौड़ा दिया। मुंबई से थाणे के बीच देश में पहली ट्रेन लेकर चलने वाला यह इंजन आज भी सप्ताह में दो दिन दिल्ली-अलवर के बीच 14 डिब्बों को लेकर दौड़ रहा है। तत्कालीन रेलमंत्री दिग्विजय सिंह ने न केवल उन्हें नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया था, बल्कि रेलवे के अधिकारियों की ओर से भी कई अवार्ड दिए गए।

टेंशन में मस्ती की तलाश

मनमोहन शर्मा पैसे के लिए भले ही बीकानेर के चक्कर लगा रहे हों, लेकिन वह फिल्मों में काम करके मस्ती के पल भी तलाश लेते हैं। राजधानी में बनी फिल्म 'गदर में मुस्लिम ट्रेन ड्राइवर की भूमिका निभाने वाले मनमोहन शर्मा अभिनेता संजीव कुमार, भारत भूषण व गोविंदा के साथ कई फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। वर्तमान में अभिनेत्री एश्वर्या राय की बन रही फिल्म 'रूठा साजन में ढाबे वाले की भूमिका में एक बार फिर वह बड़े पर्दे पर नजर आएंगे। अक्षय कुमार के साथ बन रही इस फिल्म की शूटिंग के लिए वह लद्दाख भी गए थे। 

By Ashish Mishra