दुधवा टाइगर रिजर्व में नहीं बढ़ेगा सफारी और प्रवेश शुल्क, 'बफर में सफर' से लोगों को मिलेगा रोजगार
दुधवा टाइगर रिजर्व में आगामी पर्यटन सत्र के लिए सफारी और प्रवेश शुल्क में कोई वृद्धि नहीं होगी, जिससे वन्यजीव प्रेमियों को राहत मिली है।

दुधवा टाइगर रिजर्व नहीं बढ़ेगा सफारी और प्रवेश शुल्क।
HighLights
दुधवा टाइगर रिजर्व में सफारी, प्रवेश शुल्क नहीं बढ़ेगा।
'बफर में सफर' योजना से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने, प्रभावितों को सहायता देने पर जोर।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। दुधवा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के दीदार का शौक रखने वालों के लिए राहत वाली खबर है। गुरुवार को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में दुधवा बाघ संरक्षण फाउंडेशन के शासी निकाय की बैठक में आगामी पर्यटन सत्र में सफारी और प्रवेश शुल्क में कोई बढ़ोतरी न करने का निर्णय हुआ।
साथ ही दुधवा के मुख्य वन क्षेत्रों पर पर्यटकों का दबाव कम करने और आसपास के गांवों के लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए 'बफर में सफर' योजना शुरू की जाएगी। बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां संचालित करने वाले पंजीकृत वाहनों को विशेष वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा।
वन विभाग मुख्यालय में हुई इस बैठक में बताया गया कि दुधवा में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने के साथ राजस्व में भी वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में पर्यटन से 2.15 करोड़ रुपये की आय हुई थी, जो 2025-26 में 49 प्रतिशत बढ़कर 3.20 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
लघु फिल्म के ट्रेलर का भी किया गया लोकार्पण
पार्क में एक सींग वाले गैंडों की स्थिति और निगरानी पर आधारित पुस्तक का विमोचन हुआ। भरथपुर गांव के विस्थापन और पुनर्वास पर आधारित लघु फिल्म के ट्रेलर का भी लोकार्पण किया गया। पलिया के विधायक रोमी साहनी ने सुहेली नदी में गाद जमा होने का मुद्दा उठाया।
इस पर नदी के अध्ययन और सफाई कार्य के लिए जरूरी एस्टीमेट तैयार कराने तथा बजट स्वीकृत कर जारी करने का आश्वासन दिया गया। बजट उपलब्ध होने के बाद नदी की सफाई का कार्य शुरू कराने की बात कही गई।
मंत्री ने अधिकारियों को वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी लाने के लिए आवश्यक संसाधन और तकनीक प्राथमिकता पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कहा कि संघर्ष रोकने के लिए विभाग को ठोस प्रयास करने होंगे।
यह भी निर्णय लिया गया कि इससे प्रभावित परिवारों को फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका संबंधी सहायता दी जाएगी, ताकि उनके पुनर्वास और जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
बैठक में राज्यमंत्री केपी मलिक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमूरी, विभाग की सचिव बी. चंद्रकला, वन निगम के महाप्रबंधक सुजाय बनर्जी सहित दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक, प्रभागीय वनाधिकारी और उपनिदेशक उपस्थित थे।
