लखनऊ, (जेएनएन)। मां का दूध पीते ही अगर बच्चे को उल्टी हो रही है तो इससे घबराए नहीं। बच्चे को गैस्ट्रो ईसो फेजियल रिफ्लेक्श डिजीज (जीईआरडी) हो गई है। इसमें बच्चे के आहार की नली का वॉल्व कमजोर हो जाता है। यह कुछ दिन में दवाओं से ठीक हो जाता है। सिम्मी पांडेय के सवाल पर वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष वर्मा ने यह जवाब दिया। मौका था कैसरबाग में स्थित गांधी भवन के सभागार में दैनिक जागरण पैम्पर्स शिशु स्वास्थ्यशाला का। इसमें बड़ी संख्या में माताओं ने अपने बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ी जिज्ञासाओं को शांत किया।

राजेंद्र कुमार ने पूछा कि अगर मां को थाईराइड है तो क्या वह अपने बच्चे को दूध पिला सकती है, कहीं दूध से यह बीमारी बच्चे में तो नहीं हो जाएगी। डॉ. आशुतोष वर्मा ने बताया कि यह भ्रम है मां बच्चे को दूध पिला सकती है। मां नीतू तिवारी ने पूछा कि उसके छह महीने के बच्चे को शौच नहीं होती। इस पर उन्हें बताया गया कि गाय व भैंस के दूध में प्रोटीन ज्यादा होती है। ऐसे में आप दो साल तक अपना दूध बच्चे को पिलाएं ताकि दिक्कत न हो। मां साजिया ने कहा कि मेरा बच्चा रात में चौंककर उठता है। इस पर उन्हें बताया गया कि छह महीने के बाद मां के दूध में बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं। इससे बच्चा उसे पचा नहीं पाता। रात में बच्चे को अपना दूध पिलाने की बजाए आनाज खिलाकर सुलाए तो ऐसी दिक्कत नहीं होगी।

मरियम ने पूछा कि मेरी बेटी के ऊपर के दांत निकल रहे हैं, इससे कोई दिक्कत तो नहीं। इस पर डॉ. आशुतोष वर्मा ने बताया कि बच्चे के दांत छह महीने से लेकर नवें महीने तक निकलते हैं। इससे कोई दिक्कत नहीं है। कई बार प्रोटीन की कमी से ऐसा होता है। विभा सिंह ने पूछा कि प्रसूति अवकाश सिर्फ छह महीने का होता है। ऐसे में वर्किंग लेडी किस तरह अपने बच्चे को स्तनपान करवाएं। इस पर उन्हें बताया गया कि दिन भर में तीन से चार बार बच्चा दूध पीता है। घर में अगर कोई दूसरी महिला है तो उसका दूध भी पिला सकते हैं वरना मां के दूध को स्टोर करने के लिए फिडिंग बैंक आता है। इसमें मां अपना दूध निकालकर रख दे। 25 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर मां का दूध सुरक्षित रहता है। कार्यक्रम में माताओं द्वारा अपने बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े कई सवाल पूछे गए, जिसका जवाब पाकर वह संतुष्ट हुईं।

Posted By: Anurag Gupta

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